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0 नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत समेत कांग्रेस सदस्यों ने चर्चा कराने की मांग की
रायपुर। विधानसभा बजट सत्र में गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में काटे गए लोगों के नाम पर तत्काल चर्चा कराने के लिए विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाया। मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सभापति धरमलाल कौशिक ने इसे भारत निर्वाचन आयोग का विषय बताते हुए स्थगन को अस्वीकार कर दिया। इससे नाराज विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। 

शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने एसआईआर पर स्थगन की सूचना देते हुए कहा कि राज्य में 19 लाख 13 हजार से ज्यादा लोगों के नाम कटे हैं। ये जो प्रदेश के नागरिक थे, वो लापता हैं। इस मुद्दे पर स्थगन के जरिए चर्चा की मांग है। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि ये जनहित का, राज्यहित का मुद्दा नहीं है। इसे यहां नहीं उठाया जा सकता। इसे रिकॉर्ड में भी नहीं शामिल किया जाना चाहिए। ये राज्य का मुद्दा ही नहीं है। इस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने कहा कि प्रदेश की जनता का मामला सदन में नहीं उठा सकते यह दुख का विषय है। इतने लोग अचानक गायब हो गए, ये चिंता का विषय है। लेकिन न सरकार को चिंता है और न ही विधायकों को चिंता है। विशेष कर बस्तर जैसे आदिवासी इलाके में सलवा जुडूम अभियान के दौरान विस्थापित हुए करीब 1 लाख लोगों के नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। ये छत्तीसगढ़ की जनता की बात है। इस विषय पर स्थगन लाकर चर्चा कराना चाहते हैं। 
इसका विरोध करते हुए भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने कहा कि यह केंद्र का मामला है। यह निर्वाचन आयोग का मामला है। एसआईआर के समय आयोग ने दावा-आपत्ति के लिए सभी राजनीतिक दलों को मौका दिया था। अभी कांग्रेस ने लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। किसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ चर्चा नहीं हो सकती। 
इस बीच भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश में सब ठीक चल रहा है। विपक्ष के पास मुद्दा नहीं है, इसलिए ऐसे मुद्दे ला रहे हैं। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भाजपा का नाम लिया। भाजपा का नाम लेने पर अजय चंद्राकर समेत अन्य सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई। इसके साथ ही सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया और पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस होने लगी। 
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा कि एक पार्टी के लोगों ने दूसरे बूथों के भी मतदाताओं का नाम कटवाया। इसपर चर्चा जरूरी जरूरी है। इस पर सभापति श्री कौशिक ने कहा कि यह भारत निर्वाचन आयोग का विषय है, इसलिए इस पर स्थगन प्रस्ताव की अनुमति नहीं देता हूं। आसंदी द्वारा स्थगन अग्राह्य करने पर नाराज विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।