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0 सीएम साय बोले- ईमानदार प्रतिभा को मिलेगा हक
0 नकल माफिया, फर्जी अभ्यर्थियों और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान 
0 दोषी पाए जाने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम 1 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान
0  नकल में संलिप्त अभ्यर्थियों को तीन वर्षों तक ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
0 यह पीएससी, व्यापमं, निगम-मंडल समेत सभी भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू होगा
 
रायपुर। विधानसभा बजट सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और घोटालों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन से यह विधेयक पारित किया गया। 

नए कानून के तहत नकल माफिया, फर्जी अभ्यर्थियों और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। दोषी पाए जाने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं नकल में संलिप्त अभ्यर्थियों को तीन वर्षों तक किसी भी भर्ती परीक्षा से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि युवा राज्य के विकास के केंद्र में होते हैं, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में उनके भविष्य के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएससी जैसी संस्थाओं में भ्रष्टाचार हुआ। प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए। 
सीएम श्री साय ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी, जिसके चलते कई आरोपी जेल तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून नकल गिरोहों पर निर्णायक कार्रवाई के लिए बनाया गया है। संगठित अपराध की स्थिति में आरोपियों की संपत्ति जब्त करने और कुर्की करने का भी प्रावधान किया गया है।  साथ ही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के जरिए नकल करने वालों पर विशेष रूप से सख्ती बरती जाएगी। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कानून का दायरा व्यापक होगा और यह पीएससी, व्यापमं, निगम-मंडल समेत सभी भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू होगा। जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच पुलिस उप निरीक्षक (एसआई) स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकार अन्य एजेंसियों से भी जांच करा सकेगी।  उन्होंने कहा कि कानून में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी तय की गई है। परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

विपक्ष का समर्थन, राजनीतिक टिप्पणी पर आपत्ति
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व सरकार पर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे मुद्दों पर अनावश्यक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए तथा ध्यान केवल छात्रों के हित पर केंद्रित रहना चाहिए।