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नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जन विश्वास विधेयक -दो को ' विश्वास-आधारित शासन का एक नया युग!' बताते हुए शुक्रवार को कहा कि इस विधेयक में देश भर की अदालतों में लंबित अनुमानित 5 करोड़ मुकदमों का बोझ कम होने की संभावना है।

श्री गोयल ने जन विश्वास (उपबंध संशोधन ) विधेयक 2026 को गुरुवार को पारित होने के साथ संसद के दोनों सदनों की स्वीकृति के बाद शुक्रवार को यहां इस विधेयक को लेकर एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में कहा इस विधेयक के जरिए कुल 79 केंद्रीय कानूनों में 1000 उपबंधों को संशोधित, समाप्त या उनमें आपराधिक कार्रवाई के प्रावधानों को समाप्त किया जा रहा है। इनमें से छह कानून अंग्रेजों के जमाने के हैं। श्री गोयल के साथ उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया भी थे।

वाणिज्य मंत्री ने कहा इसके माध्यम से कई जगह भूल चूक या छोटी मोटी गलती पर भी जुर्माने के प्रावधानों को हटा कर अर्थदंड लगाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे इस समय पूरे देश में अदालतों में चल रहे अनुमानित पांच करोड़ मुकदमों का त्वरित निस्तारण होने की संभावना बनी है। उन्होंने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में भी संसद की तरह यह स्पष्ट किया कि इन कानूनों के उपबंधों में संशोधन पिछली तारीख से करना कठिन था। पर इसके आधार पर स्थानीय प्रशासन अब पहले से चल रहे मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया को नये संशोधनों के परिप्रेक्ष्य में वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।

श्री गोयल ने कहा कि जन विश्वास विधेयक-1 में कुल विभिन्न कानूनों के कुल 183 उपबंधों में संशोधन का असर बहुत सकारात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि 12 राज्यों ने अपने कानूनों को लेकर जन विश्वास विधेयक लाने की प्रकिया में हैं। वाणिज्य मंत्री ने कहा, 'जन विश्वास विधेयक 2026 वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार के "जीवन जीने की आसानी " और " कारोबार की आसानी " को बढ़ावा देने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।' उन्होंने कहा कि इन संशोधनों से अनुपालन (कंप्लायंस) का कम बोझ नागरिकों, एमएसएमई, छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाएगा, जिससे एक अधिक सक्षम और पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण होगा।

उन्होंने कहा, 'ऐतिहासिक जन विश्वास विधेयक, 2026 विश्वास-आधारित शासन व्यवस्था की दिशा में एक निर्णायक कदम है। दशकों तक भारत की कानूनी व्यवस्था पर औपनिवेशिक काल के प्रावधानों का प्रभाव रहा, जहां अक्सर मंशा की बजाय दंड को प्राथमिकता दी जाती थी। यह सुधार एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जिसमें 1,000 से अधिक अपराधों को गैर-आपराधिक (डीक्रिमिनलाइज़) किया गया है और 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन किया गया है।" उन्होंने कहा, " इसके साथ ही चेतावनी, दंड और जवाबदेही की एक चरणबद्ध प्रणाली लागू की गई है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि छोटे, बिना दुर्भावना वाले उल्लंघन जीवनभर का बोझ न बनें, जबकि गंभीर अपराधों पर सख्ती बनी रहे।"

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के दृष्टिकोण से प्रेरित यह विधेयक ईमानदार नागरिकों, एमएसएमई, छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को सशक्त बनाता है, अनुपालन बोझ को कम करता है और भारत के विकसित भारत की ओर बढ़ते कदमों में विश्वास को मजबूत करता है।