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0 कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी
नई दिल्ली। सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है।

इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर एटीएफ मार्केटिंग नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले से न केवल हवाई यात्रा क्लीन होगी, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी।

नए नियमों के तहत फ्यूल की परिभाषा बदली
मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल की परिभाषा को अपडेट किया गया है। अब एटीएफ में हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ सिंथेसाइज्ड कंपोनेंट्स (जैसे एथेनॉल) को भी शामिल किया जा सकेगा। यह भारतीय मानकों के अनुरूप होगा। सरकार का यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) के चलन को ध्यान में रखकर किया गया है।

तेल आयात और विदेशी मुद्रा की बचत होगी
भारत अपनी जरूरत का करीब 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अक्सर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हवाई ईंधन में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल की खपत कम होगी, जिससे सरकार को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी।

100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेटः गडकरी 
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। हमें फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। गडकरी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं।

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