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0 कहा- यहां जीत का अंतर एसआईआर में कटे वोटों से कम
0 कोर्ट बोला- नई याचिकाएं लगाएं

नई दिल्ली/कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बंगाल में सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर में कटे वोटों से कम मामले में ममता बनर्जी और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं। अब टीएमसी 31 सीटों के नतीजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। 

टीएमसी ने दावा किया कि हालिया विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर जीत का अंतर, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था।दरअसल, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच बंगाल में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
इसी दौरान टीएमसी सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने बागची की उस टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो अदालत शिकायतों पर विचार कर सकती है।

भाजपा को बंगाल में 207 सीटें मिलीं, पहली बार सरकार बनाई
हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतीं हैं, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिली हैं। इन चुनावों में राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई। भाजपा को कुल 2 करोड़ 92 लाख 24 हजार 804 वोट मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस को 2 करोड़ 60 लाख 13 हजार 377 वोट मिले हैं। भाजपा को टीएमसी से 32 लाख 11 हजार 427 ज्यादा वोट मिले हैं। यानी 293 सीटों के हिसाब से भाजपा को हर सीट पर औसत 10,960 वोट ज्यादा मिले। राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) से कुल 91 लाख वोट कटे। यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोटरों के नाम काटे गए। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा।

भाजपा ने 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं
बंगाल में 30 हजार से कम मार्जिन पर जीत वाली 176 सीटों में भाजपा की 128 सीटें हैं। वहीं, 30 हजार से ज्यादा मार्जिन पर जीत वाली 117 सीटों में भाजपा की 79 सीटें हैं। तृणमूल की 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा है। 2021 में भाजपा की 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम ​मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में ऐसी 93.5% थीं। साल 2021 में 121 सीटों पर तृणमूल की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 94 पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दर्शाते हैं। इस बार भाजपा की 25 सीटें ऐसी हैं, जहां हटाए या अयोग्य घोषित मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक है।