0 अवैध प्रवासियों को सीएए से नागरिकता का हक नहीं
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को कोर्ट की बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपेगी। श्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि नया नियम 20 मई से लागू हो गया है।
सीएम सुवेंदु ने कहा कि इस बारे में पुलिस कमिश्नर और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नए नियम के मुताबिक, जो लोग अवैध प्रवासी पाए जाएंगे और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत नागरिकता पाने के हकदार नहीं होंगे।
बंगाल में सीएए की प्रक्रिया शुरू
मुख्यमंत्री सुवेंदु ने बुधवार को कहा था कि आज हमने कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। सीएए के तहत आने वाले 7 समुदायों और 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए लोगों को नागरिकता कानून का लाभ मिलेगा। पुलिस उन्हें हिरासत में नहीं ले सकेगी। जो लोग सीएए के दायरे में नहीं आते, वे अवैध घुसपैठिए हैं। राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर बीएसएफ को सौंपेगी। इसके साथ ही उन्होंने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर की 27 किलोमीटर जमीन बीएसएफ को सौंपी। इस पर फेंसिंग लगाने और सुरक्षा स्ट्रक्चर बनाया जाएगा।
कोलकाता में बीएसएफ को जमीन देने के लिए हुई बैठक में कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। जमीन सौंपने की प्रक्रिया 2 हफ्तों में पूरी हो जाएगी। आगे जहां भी सीमा सुरक्षा के लिए जमीन की जरूरत होगी, राज्य सरकार उसे बीएसएफ को उपलब्ध कराएगी।
600 किलोमीटर सीमा अब भी बिना फेंसिंग के
अधिकारी ने कहा कि राज्य की 2200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से करीब 1600 किलोमीटर हिस्से में फेंसिंग हो चुकी है, जबकि लगभग 600 किलोमीटर सीमा अब भी बिना फेंसिंग के है।
भारत बांग्लादेश की सीमा 4,097 किलोमीटर लंबी
भारत, बांग्लादेश के साथ 4,097 किलोमीटर लंबी बॉर्डर शेयर करता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार लगभग 3,240 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है और लगभग 850 किलोमीटर, जिसमें 175 किलोमीटर का दुर्गम भूभाग भी शामिल है, इस पर बाड़बंदी होनी बाकी है। सीएम अधिकारी ने दावा किया कि प्रस्तावित 127 किलोमीटर के खंड में से केवल लगभग 8 किलोमीटर के हिस्से को ही ममता बनर्जी की सरकार के कार्यकाल में फेंसिंग की गई थी। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। यह भारत-बांग्लादेश की सबसे लंबी स्टेट बॉर्डर है।