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0 सुप्रीम कोर्ट बोला- कंटेंट पर सवाल, व्यक्ति पर नहीं; लिखने वालों पर सरकार फैसला करे
नई दिल्ली। एनसीईआरटी बुक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर पर हुए विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दो महीने पहले दिया फैसला बदल दिया है। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन तीन शिक्षाविदों ने विवादित हिस्सा लिखा। उन्हें हटा दिया जाए और दोबारा काम न दिया जाए।

अब शुक्रवार को तीनों शिक्षाविदों की याचिका पर कोर्ट ने आदेश बदलते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, यूनिवर्सिटी और सरकारी फंड पाने वाले संस्थान इस मामले में खुद फैसला लें।
मामले में जिन 3 शिक्षाविदों का नाम आया था। उनमें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार शामिल हैं। पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन लोगों ने जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और छात्रों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि दिखाई। अब कोर्ट ने यह टिप्पणी वापस ले ली है।

क्या था पूरा मामला
एनसीईआरटी ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्‍यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। जज आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है, बल्कि कोर्ट के बाहर उनके आचरण को भी तय करती है। किताब के एक सेक्शन का टाइटल ‘जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड’ है। इसका मतलब है- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया, किताब पर बैन लगाया
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया। ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर वाली एनसीईआरटी के 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब बैन कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने किताब छापने और बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि जो किताबें छप चुकी हैं, उसे जब्त कीजिए और डिजिटल कॉपियों को भी हटाइए।

सीजेआई की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने माफी मांगी
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद बुधवार रात को एनसीईआरटी ने कहा कि वे ज्यूडिशियरी का बहुत सम्मान करते हैं। किताब में गलती अनजाने में हुई है और एनसीईआरटी को उस चैप्टर में गलत मटेरियल शामिल करने का अफसोस है। चैप्टर को दोबारा लिखा जाएगा।