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0 प्रदेश के चर्चित शराब घोटाला, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटाले में अग्रवाल का नाम सामने आया है 
0 इन मामलों में जांच एजेंसियां लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थीं

रायपुर/धमतरी। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटाले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नान अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने बुधवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया, जहां एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि इन मामलों में जांच एजेंसियां लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थीं। वे पिछले तीन साल से फरार चल रहे थे। 

सूत्रों के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल ने ईओडब्ल्यू के समक्ष आत्मसमर्पण किया। बताया जा रहा है कि इससे पहले उनके बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की गई थी। कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं का आरोप है कि पूछताछ के दौरान वैभव अग्रवाल पर मानसिक दबाव बनाया गया, जिसके बाद रामगोपाल अग्रवाल ने स्वयं जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होने का फैसला किया। वहीं राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि वे पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ के ही किसी शहर में अंडरग्राउंड थे। हालांकि, इन दावों की ईओडब्ल्यू या किसी अन्य आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। फिलहाल ईओडब्ल्यू रामगोपाल अग्रवाल से विभिन्न मामलों में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

बेटे से पूछताछ के अगले दिन पहुंचे ईओडब्ल्यू कार्यालय
जानकारी के अनुसार, कस्टम मिलिंग प्रकरण में जारी समन के बाद रामगोपाल अग्रवाल बुधवार को ईओडब्ल्यू के समक्ष उपस्थित हुए। इससे पहले मंगलवार को उनके बेटे वैभव अग्रवाल से आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने कई घंटे तक पूछताछ की थी। इसके बाद रामगोपाल अग्रवाल का सामने आना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

घोटाले में शामिल होने का आरोप
रामगोपाल अग्रवाल का नाम करीब 3 हजार करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले, 540 करोड़ रुपए के कोल लेवी वसूली मामले और 127 करोड़ रुपए के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले की जांच में सामने आया है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

क्या है कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन मामला?
ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान की कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के निर्धारण और भुगतान में कथित अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसी का आरोप है कि नियमों के विपरीत कुछ चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे करीब 127 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की आशंका है। मामले में संबंधित अधिकारियों, राइस मिलर्स और अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कोल लेवी मामले में क्या हैं आरोप?
कोल लेवी प्रकरण वर्ष 2020 से 2022 के दौरान कोयला परिवहन से कथित अवैध वसूली से जुड़ा है। ईडी और ईओडब्ल्यू का दावा है कि कोयला कारोबारियों से प्रति टन तय राशि वसूली गई, जिससे लगभग 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी एकत्र होने का आरोप है। इस मामले में कई अधिकारी, कारोबारी और अन्य प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। प्रकरण फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में है।

शराब घोटाले की भी हो रही जांच
राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले में भी रामगोपाल अग्रवाल का नाम जांच के दौरान सामने आया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क से करीब 3200 करोड़ रुपये के अनियमित लेन-देन का आरोप है। हालांकि, इस मामले में भी अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है।

 

 

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