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0 फर्जी पासपोर्ट से पहुंचने का आरोप, 7 साल से फरार, अब भारत लाने की तैयारी
रायपुर। महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई है। उस पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है। सौरभ पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह रहा था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ को भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उसे वापस लाने के लिए ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण की तैयारियों में जुटी है। रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ को ओमान की राजधानी मस्कट स्थित हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। 
बताया जा रहा है कि उसने अपनी कानूनी पैरवी के लिए स्थानीय वकीलों की टीम भी नियुक्त की है। हालांकि ओमान के कानून के जानकारों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट के मामले में उसे आसानी से जमानत मिलना मुश्किल होगा। रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ के खिलाफ फर्जी यात्रा दस्तावेज का इस्तेमाल कर ओमान में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों को संदेह है कि उसने भारत की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को लंबा खींचने के उद्देश्य से यह रास्ता अपनाया है। 
बता दें कि सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। वह करीब 5000 करोड़ रुपये के बेटिंग एप घोटाले का आरोपी है और 2019 से फरार है। 

फर्जी पासपोर्ट से ओमान पहुंचने का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल और अवैध तरीके से ओमान में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि उसने अपनी पैरवी के लिए मस्कट में वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है।

इंटरपोल रेड नोटिस बरकरार
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई हजारों करोड़ रुपए के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं। हाल ही में इंटरपोल की कमिशन फॉर द कंट्रोल ऑफ इंटरपोल्स फाइल्स (सीसीएफ) ने सौरभ की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी।
सौरभ का दावा था कि भारत में उनके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। लेकिन सीसीएफ ने कहा कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, न कि राजनीतिक उत्पीड़न से, इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।

क्या होता है रेड नोटिस
इंटरपोल रेड नोटिस इंटरपोल द्वारा जारी किया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट है। इसका उद्देश्य किसी ऐसे आरोपी या दोषी व्यक्ति का पता लगाना और उसे अस्थायी रूप से हिरासत में लेना होता है, ताकि बाद में उसका प्रत्यर्पण या कानूनी कार्रवाई की जा सके।

भारत लाने में आ सकती हैं कानूनी अड़चनें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सौरभ चंद्राकर ने सीसीएफ में सुनवाई के दौरान ही यूएई छोड़ दिया था। अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करना उसकी एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, ताकि भारत प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी हो। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध माना जाता है, जिसकी सजा 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकती है।

2024 में भी इंटरपोल रेड नोटिस पर हुई थी कार्रवाई
2019 से फरार चल रहे सौरभ चंद्राकर को यूएई से भारत लाने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। साल 2024 में दुबई में उसे कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया। उस समय इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर यूएई अधिकारियों ने सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया था और कुछ समय तक हाउस अरेस्ट में रखा था। भारत ने उसके प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध भी भेजा था, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका।

अब तक 4336 करोड़ की संपत्तियां अटैच
ईडी ने इस मामले में अब तक 175 से ज्यादा ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किए हैं। 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 74 लोगों को आरोपी बनाया गया। साथ ही रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में 5 प्रॉसिक्यूशन शिकायतें दाखिल की गई हैं। एजेंसी के मुताबिक, अब तक इस मामले में कुल 4336 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं।

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