0 कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत
नई दिल्ली। सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से एक डिटेल्ड कम्प्लायंस रोडमैप भी मांगा है।
इसमें कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। यह निर्देश आईटी मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों और मेटा के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दिए गए। बैठक में मेटा की टेक्निकल टीम ने नुकसानदेह ऑनलाइन कंटेंट से निपटने के लिए अपने मौजूदा सिस्टम्स और जारी प्रयासों पर एक प्रेजेंटेशन भी पेश किया।
सरकार के निर्देशों की 3 प्रमुख बातें
0 एल्गोरिदम में बदलाव: सरकार ने मेटा को अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में ऐसे बदलाव करने को कहा है, जिससे प्रोपेगैंडा, डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज और किसी भी तरह के हेरफेर किए गए कंटेंट की रीच को सीमित किया जा सके।
0 डेटा लोकलाइजेशन: कंपनी को भारत के डेटा लोकलाइजेशन नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
0 कंटेंट तुरंत हटाना: अधिकृत सरकारी एजेंसियों द्वारा फ्लैग किए गए आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रोसेस को तेज करने के लिए कहा गया है।
मेटा को सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करना होगा
केंद्र सरकार ने मेटा से कहा है कि वह भारत सरकार के सभी विभागों की क्विक रिस्पॉन्स टीम्स (क्यूआरटीएस) के साथ नजदीकी तालमेल स्थापित करें और उन्हें मिलकर काम करना होगा। इस कदम का मकसद डीपफेक वीडियो, एडिटेड तस्वीरों और भ्रामक कंटेंट की रियल-टाइम में तेजी से पहचान करना और उन्हें तुरंत हटाना सुनिश्चित करना है। इससे झूठी और नुकसानदेह जानकारियों को तेजी से वायरल होने से रोका जा सकेगा।
मेटा ने स्वीकार कीं अपने सिस्टम की कमियां
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इसके कुछ ही घंटे पहले मेटा ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ चर्चा के दौरान अपने एल्गोरिदम सिस्टम में कमियां होने की बात स्वीकार की थी। बातचीत के दौरान कंपनी के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में मौजूद गैप्स और भारतीय कानूनों के पालन से जुड़े मुद्दों पर मुख्य रूप से फोकस किया गया।