0 मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक ग्रोथ धीमी पड़ सकती है
नई दिल्ली। मौजूदा वित्त वर्ष यानी वित्तीय वर्ष-27 में भारत की आर्थिक ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। बढ़ती महंगाई ग्रोथ की गति धीमी कर सकती है। क्योंकि जीएसटी रिफॉर्म का जोश भी अब ठंडा होता नजर आ रहा। फिच ग्रुप कंपनी बीएमआई ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इसका जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की ग्रोथ वित्तीय वर्ष 27 में 6.6 फीसदी रह सकती है। यह पिछले वित्त वर्ष यानी वित्तीय वर्ष 26 में 7.7 फीसदी थी। आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार पर असर डालने का काम महंगाई है, जो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से चिंता का सबब बनी हुई है।
महंगाई का घरेलू इनकम पर असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ने के बावजूद भारत एशिया-पेसिफिक की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकोनॉमी बनी रहेगी। हालांकि, वेस्ट एशिया में यानी अमेरिका-ईरान में फिर से तनाव बढ़ने का जोखिम अभी भी बरकरार है। इसके अलावा कमजोर मॉनसून तो बड़ी टेंशन तो है ही।
बीएमआई की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी रिफॉर्म के बूस्टर डोज के बावजूद भारत की आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार धीमी रहेगी। क्योंकि महंगाई का टेंशन बरकरार है. मौजूदा वित्त वर्ष 26 में औसत महंगाई दर 5.4 फीसदी रह सकती है। चुंकि महंगाई बढ़ेगी तो घरेलू इनकम पर निगेटिव असर पड़ेगा।
पिछले साल हुआ था जीएसटी रिफॉर्म
केंद्र ने पिछले साल सितंबर में जीएसटी रिफॉर्म का ऐलान किया था। ताकि आर्थिक ग्रोथ की गति बनी रहे, लेकिन महंगाई का ट्रिगर अब हावी होता नजर आ रहा। जीएसटी रिफॉर्म के तहत सरकार ने 375 आइटम्स पर दरों को घटा दिया था। इसको 2 स्लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी में रखा गया है, जोकि पहले 4-टीयर स्ट्रक्चर में था।
बीएमआई ने रिपोर्ट में एशिया-पेसिफिक के लिए अभी भी यूएस-ईरान तनाव को बड़ा रिस्क माना है। क्योंकि इसके बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतों में जोश देखने को मिलता है। नतीजतन, रियल इनकम और प्राइवेट कंजप्शन पर सीधा असर दिखता है। ऐसे में 2027 में एपीएसी ग्रोथ 4.1 फीसदी रहने का अनुमान है। साथ ही इसी तिमाही में यूएस-ईरान में शुरुआती समझौते के लागू होने की संभावना है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि कच्चे तेल की कीमतों में अगर बेसलाइन 86 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर का स्तर देखा गया तो ग्रोथ अनुमान में फिर से बदलाव किया जा सकता है।