Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 मौत के लिए जहरीले इंजेक्शन या गोली मारने जैसे तरीकों की मांग की गई थी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा देने के लिए फांसी की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके कारण फांसी को असंवैधानिक घोषित किया जाए।

याचिका में फांसी को क्रूर, अमानवीय और दर्दनाम बताया गया था। इसकी जगह जहरीले इंजेक्शन, गोली मारने जैसे चार वैकल्पिक तरीकों से मौत की सजा देने की मांग की गई थी। 

केंद्र चाहे तो फांसी के तरीके की समीक्षा करा सकता हैः सुप्रीम कोर्ट 
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका खारिज करने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में संवैधानिक समीक्षा का रास्ता बंद हो गया है। अगर ठोस वैज्ञानिक, मेडिकल या अनुभवजन्य सबूत सामने आते हैं, तो इस मुद्दे की दोबारा जांच की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार विशेषज्ञों की समिति बनाकर मौजूदा फांसी की व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर सकती है। समिति यह जांच सकती है कि क्या कोई वैकल्पिक तरीका अनावश्यक पीड़ा कम करने और दोषी की गरिमा बनाए रखने में बेहतर है।

याचिका में कहा था- कम दर्द देने वाले तरीके अपनाए जाएं
वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा ने 2017 में यह याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया था कि फांसी की प्रक्रिया में 40 मिनट से ज्यादा लग सकते हैं, जबकि गोली मारने में कुछ मिनट और जहरीले इंजेक्शन में करीब 5 मिनट लगने का दावा किया गया। याचिका में सीआरपीसी की धारा 354(5) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी। इसी धारा के तहत मौत की सजा पाए दोषी को गर्दन से तब तक लटकाया जाता है, जब तक उसकी मौत न हो जाए। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और गरिमा के अधिकार के खिलाफ बताया गया। मल्होत्रा ने यह भी कहा था कि मौत की सजा पाए कैदी को फांसी और जहरीले इंजेक्शन में से कोई एक तरीका चुनने का विकल्प मिलना चाहिए।

केंद्र ने फांसी को ‘तेज और आसान’ तरीका बताया था
2018 में केंद्र ने मौजूदा व्यवस्था का बचाव किया था। गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा था कि फांसी से मौत तेज और आसान होती है और इससे कैदी की पीड़ा अनावश्यक रूप से नहीं बढ़ती। केंद्र ने जहरीले इंजेक्शन और गोली मारने जैसे तरीकों को भी कम पीड़ादायक मानने से इनकार किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के तरीके पर डेटा मांगा
मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी से होने वाली पीड़ा, मौत में लगने वाले समय और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर केंद्र से बेहतर डेटा मांगा था। कोर्ट ने इस मुद्दे की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने पर भी विचार किया था। मई 2023 में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया था कि उन्होंने मौत की सजा के लिए बेहतर विकल्प की जांच करने वाली विशेषज्ञ समिति बनाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार समिति के सदस्यों पर विचार कर रही थी।