0 एफसीएनआर (बी) जमा का सबसे बड़ा योगदान
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेष अमेरिकी डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा के जरिये 31 अगस्त 2026 तक कुल 136.37 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा देश में आई है, जो इस सुविधा के तहत अब तक हुआ कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह है।
शनिवार को जारी RBI के आंकड़ों के मुताबिक, इसमें सबसे बड़ा हिस्सा एफसीएनआर(बी) जमा का रहा। इसके जरिये 127.22 अरब डॉलर आए, जो कुल राशि का करीब 90 फीसदी है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा में विदेशी उधारी (ओएफसीबी) से 5.26 अरब डॉलर और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) से 3.89 अरब डॉलर आए।
यह सुविधा RBI ने 8 जून 2026 को शुरू की है। इसका मकसद बैंकों के जरिये देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाना है। इसके लिए तीन रास्ते तय किए गए है-एफसीएनआर(बी) जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा में विदेशी उधारी (ओएफसीबी)। इन तीनों माध्यमों से बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने की सुविधा दी गई है।
इनमें एफसीएनआर(बी) जमा के लिए यह सुविधा 31 अगस्त 2026 को बंद हो गई है। हालांकि, ईसीबी और ओएफसीबी के लिए बैंक 31 दिसंबर 2026 तक इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, पहले से तय जमा के लिए बैंक 11 सितंबर तक स्वैप सुविधा ले सकते हैं। इस योजना के तहत जमा की अवधि कम से कम तीन साल और अधिकतम पांच साल रखी गई है। अब तक आए ज्यादातर विदेशी मुद्रा प्रवाह पांच साल की अवधि वाली जमा के जरिये हुआ है।
तीनों माध्यमों में एफसीएनआर(बी) जमा से आया 127.22 अरब डॉलर का प्रवाह सबसे अधिक रहा, जबकि ओएफसीबी से 5.26 अरब डॉलर और ईसीबी के जरिये 3.89 अरब डॉलर आए हैं।