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0 महंगाई बढ़ने की जताई आशंका

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है और साथ ही महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए खुदरा मुद्रास्फीति भी 5.2 प्रतिशत पर रहने की संभावना व्यक्त की है।

केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बुधवार को समाप्त तीन दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जारी बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 प्रतिशत लगाया गया है। दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में इसके 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 6.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2027) में 5.7 प्रतिशत रहने की संभावना है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई का अनुमान 5.6 प्रतिशत है। इसके अलावा मौजूदा वित्त वर्ष में कोर महंगाई (जिसमें खाद्य एवं ईंधन को शामिल नहीं किया जाता है) 4.4 प्रतिशत रह सकती है।

इससे पहले, अगस्त की बैठक में केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था। अर्थव्यवस्था की मजबूती को देखते हुए जीडीपी वृद्धि का अनुमान भी 0.40 प्रतिशत बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है। पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने के बाद यह बदलाव किया गया है। अगस्त के बयान में केंद्रीय बैंक ने जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था। दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

श्री मल्होत्रा ने कहा कि जुलाई के 4.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में खुदरा महंगाई 4.8 प्रतिशत हो गई। ऐसा मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुआ। खाने-पीने की चीजों में अधिकतर के दाम बढ़े हैं। चीनी और प्याज जैसी कुछ चीजों की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल आया है। अगस्त में ईंधन की महंगाई में भी थोड़ी बढ़ोतरी हुई। कोर महंगाई दर भी अगस्त में 4.2 प्रतिशत हो गई, जबकि उससे पहले के तीन महीनों से यह 3.9 प्रतिशत पर स्थिर थी। कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई अगस्त में 2.9 प्रतिशत पर रही।

उन्होंने कहा कि कमजोर मानसून, अल-नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण निकट भविष्य में आपूर्ति पक्ष पर दबाव बने रहने की संभावना है। तेल के अलावा, खाने-पीने की चीजों में भी कई तरह की कॅमोडिटी की कीमतों पर दबाव बढ़ता हुआ दिख रहा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधि में मजबूती दिख रही है। अब तक उपलब्ध नियमित आंकड़े बताते हैं कि दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधि में तेजी बनी हुई है, हालांकि पिछली तिमाही की तुलना में इसमें थोड़ी कमी आई है। खरीफ की बुआई पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम रही है। लागत के दबाव के बावजूद विनिर्माण गतिविधि अच्छी बनी हुई है। हालांकि, गैर-टिकाऊ वस्तुओं और घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या जैसे क्षेत्रों में कुछ कमजोरी देखी गई है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों का घरेलू आर्थिक गतिविधि पर कुछ असर पड़ने की आशंका है। कमजोर मानसून और मजबूत अल-नीनो की स्थिति आने वाले रबी मौसम और ग्रामीण मांग पर असर डाल सकती है। गैर-कृषि गतिविधियों के मजबूत बने रहने की उम्मीद है जिससे ग्रामीण खपत को समर्थन मिलता रहेगा। बुनियादी ढांचों पर खर्च बढ़ाने, निजी पूंजीगत व्यय में सुधार और मजबूत ऋण उठाव पर सरकार के लगातार जोर से निवेश गतिविधि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।