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0 केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया फैसला 
नई दिल्ली। सरकार ने दिवाली से ठीक पहले केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन भोगियों को तोहफा देते हुए महंगाई भत्ता और महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। बढ़ी हुई दरें गत 1 जुलाई से लागू होंगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस निर्णय के अंतर्गत केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत दर में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। 

1 जुलाई से लागू होगा बढ़ा हुआ डीए
यह बढ़ा हुआ डीए 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। इससे पहले अप्रैल में सरकार ने 2% की बढ़ोतरी की थी, जिससे यह बढ़कर बेसिक सैलरी का 60% हो गया था। इस नए इजाफे के बाद कर्मचारियों की जेब में और ज्यादा पैसे आएंगे।

साल में दो बार रिवाइज होता है भत्ता
केंद्र सरकार हर साल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए डीए और डीआर में दो बार संशोधन करती है। पहला संशोधन आमतौर पर जनवरी से और दूसरा जुलाई से प्रभावी होता है।सरकार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू) के आंकड़ों के आधार पर महंगाई का आकलन करती है और उसी अनुपात में भत्ते बढ़ाने का निर्णय लेती है।

महंगाई के हिसाब से मिलता है अलाउंस
डीए सरकारी कर्मचारियों के रहन-सहन के खर्च को संतुलित करने के लिए दिया जाने वाला अलाउंस है। यह कर्मचारी की बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में तय होता है। वहीं, डीआर रिटायर्ड कर्मचारियों यानी पेंशनर्स को उनकी बेसिक पेंशन पर दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दामों के असर को कम करना है।

इसका सीधा असर आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा?
इस बात को ऐसे समझिए कि डीए में 3% की इस बढ़ोतरी का मतलब है कि अब कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी पर पहले से 3% ज्यादा डीए मिलेगा। इससे हर महीने मिलने वाली सैलरी और पेंशन में सीधा इजाफा होगा। महंगाई के इस दौर में सरकार के इस फैसले से देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। गौरतलब है कि सरकार जल्द ही इसके औपचारिक आदेश जारी कर सकती है, जिसके बाद बढ़ा हुआ पैसा कर्मचारियों के खातों में आना शुरू हो जाएगा।
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खेलों के सामान की विनिर्माण योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी, 1,856.67 करोड़ रुपए होंगे खर्च
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 2026 से 2033-34 तक के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये की लागत से 'खेलो इंडिया खेल सामान विनिर्माण योजना' को मंजूरी दी है जिसका उद्देश्य देश में खेलों के सामान के निर्माण, तकनीक, शोध, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देना तथा वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस योजना के तहत खेल सामान विनिर्माण क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जहां निर्माता, आपूर्तिकर्ता, जांच केंद्र और डिजाइन सुविधाएं एक साथ उपलब्ध होंगी। घरेलू और विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और निर्माण क्षमता के विस्तार से जुड़ी सहायता पर 1,130 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि योजना में छोटे और मझोले उद्योगों के मौजूदा निर्माण केंद्रों के उन्नयन, साझा सुविधाओं के विकास और अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से गुणवत्ता प्रमाणन के लिए भी सहायता का प्रावधान है। प्रमाणन के लिए 105 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, खेल उपकरणों, नई सामग्रियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। स्टार्टअप, कौशल विकास और भारतीय खेल सामान की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। श्री वैष्णव ने कहा कि योजना से घरेलू निर्माण क्षमता मजबूत करने, आयात पर निर्भरता घटाने, निवेश और रोजगार बढ़ाने तथा भारतीय खेल सामान के निर्यात को प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी।

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कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में कंटेनर विनिर्माण को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान वाली कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी। 
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