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नई दिल्ली। सरकार ने स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएम वीजीएसवाई) को मंजूर की है जिस पर कुल 7,395.55 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे।

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएम वीजीएसवाई) को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होने वाली इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत करना, ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को व्यापक बनाना और गांवों में पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि योजना पर कुल 7,395.55 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्य सरकारों की हिस्सेदारी 2,526.07 करोड़ रुपये होगी। इसके तहत देशभर की 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के करीब 32 लाख निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों तथा अन्य संबंधित पक्षों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। योजना के तहत प्रत्येक वर्ष कम से कम 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने में सहायता दी जायेगी।

इन योजनाओं में गांवों की स्थानीय प्राथमिकताओं, केंद्र और राज्य सरकारों की संबंधित योजनाओं तथा उपलब्ध संसाधनों को एक साथ शामिल किया जायेगा। इसके लिए ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर सहभागी और तथ्यों पर आधारित नियोजन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जायेगा, ताकि विकास कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार की जा सकें। योजना का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय पहलों के बारे में जागरूक करना भी है। इसके तहत प्रत्येक समन्वित जागरूकता अभियान के माध्यम से कम से कम एक करोड़ नागरिकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ग्राम सभाओं, पंचायत मंचों, डिजिटल माध्यमों और मौजूदा जनसंपर्क व्यवस्थाओं का उपयोग किया जायेगा। इससे ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना के तहत पंचायतों की प्रशासनिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जायेगा। करीब 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों को हर साल क्षमता निर्माण तथा डिजिटल माध्यमों से तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की योजना है। इससे पंचायतों को विकास योजनाएं तैयार करने, नागरिकों के साथ संवाद बढ़ाने, संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने और स्थानीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति करने में मदद मिलेगी। योजना के तहत पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए भी प्रावधान किये गये हैं। प्रत्येक वर्ष कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट योजनाएं तैयार करने और संबंधित लेखा-परीक्षाओं को समय पर पूरा करने में सहायता दी जायेगी। इसके लिए ऑडिटऑनलाइन मंच का उपयोग किया जायेगा। बेहतर लेखांकन, सार्वजनिक वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराने और पंचायतों के अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जायेगा, ताकि पंचायतें उपलब्ध धनराशि का प्रभावी उपयोग कर सकें और वित्तीय रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनें।