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चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएलवी के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के साथ स्पार्क टॉर्च इग्नाइटर का उपयोग करके प्रक्षेपण यान चरणों के प्रज्वलन परीक्षण का कई बार पुनः आरंभ सफलतापूर्वक पूरा किया है।
एक अपडेट में, इसरो ने कहा कि वह अगले पीढ़ी के प्रक्षेपण यान के लिए लॉक्स-मीथेन इंजन और चरणों का विकास कर रहा है, जिसमें एक पुन: प्रयोज्य बूस्टर चरण और दो नष्ट होने वाले ऊपरी चरणों का उपयोग किया जाता है।
इस विन्यास में, बूस्टर चरण की पुनर्प्राप्ति के लिए एकाधिक पुनः आरंभ आवश्यक होंगे, साथ ही मिशन लचीलेपन के लिए ऊपरी चरण को पुनः आरंभ करना भी आवश्यक होगा।
तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो का द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) भविष्य के लॉक्स-मीथेन चरणों के लिए स्पार्क टॉर्च इग्नाइटर विकसित कर रहा है, जिसके निम्नलिखित लाभ होंगे: मल्टी-रीस्टार्ट क्षमता, उच्च प्रज्वलन विश्वसनीयता और स्वच्छ दहन उत्पाद आदि।
तीन मार्च 2025 को, स्पार्क टॉर्च इग्नाइटर का एक प्रदर्शन मॉडल जीएसएलवी क्रायोजेनिक उपरी चरण वर्नियर इंजन का उपयोग करके सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया, जिसमें ईंधन के रूप में गैसीय ऑक्सीजन और गैसीय हाइड्रोजन का उपयोग किया गया।
यह परीक्षण एलपीएससी के दहन अनुसंधान सुविधा में किया गया और सुचारू प्रज्वलन प्राप्त किया गया। यह परीक्षण कुल तीन सेकंड की अवधि के लिए किया गया और परीक्षण के दौरान प्राप्त सभी इंजन पैरामीटर सामान्य और अपेक्षा के अनुरूप थे।
इसरो ने कहा कि प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए आगामी परीक्षण की भी योजना बनाई गई है।