
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को धान खरीदी पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर लगभग 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया और सदन की कार्यवाही रोककर इस पर चर्चा की मांग की, लेकिन स्थगन मंजूर नहीं होने से नाराज विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व सीएम भूपेश बघेल और अन्य कांग्रेस विधायकों ने धान खरीदी में गड़बड़ी के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्पादन से अधिक धान खरीदी दिखाकर भ्रष्टाचार किया गया है।
इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम कहा कि हमारी सरकार ने धान खरीदी में बेहतर व्यवस्था की है। विपक्ष के आरोप निंदनीय और आपत्तिजनक हैं।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों की मेहनत पर पानी फेरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि धान उत्पादन से 36 फीसदी अधिक खरीदी हो रही है, जिससे बड़े घोटाले की आशंका है। उन्होंने कहा कि धान खरीद में राज्य को करीब 8 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।
उमेश पटेल ने भी समर्थन करते हुए कहा कि धान खरीदी कोई छोटा मामला नहीं है और इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के बावजूद सत्तापक्ष जवाब देने से बच रहा है। भूपेश बघेल कहा कि सरकार धान खरीदी में हुए भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश कर रही है। मंत्री को पूरे सवालों का जवाब देना चाहिए। कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्र में हुई खरीदी की पोल खोलते हुए बातें रखी। और चर्चा की मांग की। इस पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी विरोध करते हुए कांग्रेस काल में हुई गड़बड़ी को उजागर किया। इसके बाद स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने स्थगन पर चर्चा की अनुमति नहीं दी। इस पर नाराज विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर गए।