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कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए बुधवार को 11 जिलाधिकारियों (डीएम) और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के आयुक्त को उनके पद से हटा दिया है। आयोग इससे पहले भी राज्य के शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई कर चुका है।

आयोग की बुधवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रशासनिक तटस्थता को मजबूत करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर प्रमुख जिलों में जिलाधिकारी-सह-जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) के रूप में तैनात करने का निर्देश दिया गया है। इस बड़े फेरबदल के तहत आयोग ने कई जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को बदलते हुए नए अधिकारियों की नियुक्ति की है।

आदेश के मुताबिक, कूचबिहार में राजू मिश्रा के स्थान पर जितिन यादव और जलपाईगुड़ी में रवि प्रकाश मीणा की जगह संदीप घोष को नियुक्त किया गया है। उत्तर दिनाजपुर में भी बदलाव किया गया है, जहाँ सुरेंद्र कुमार मीणा के स्थान पर विवेक कुमार कार्यभार संभालेंगे। इसी प्रकार मालदा और मुर्शिदाबाद में क्रमशः प्रीति गोयल और नितिन सिंघानिया के स्थान पर राजबीर सिंह कपूर और आर अर्जुन को तैनात किया गया है।

नदिया जिले में निखिल निर्मल को हटाकर श्रीकांत पल्ली को लाया गया है, जबकि पूर्वी बर्धमान में आयशा रानी की जगह श्वेता अग्रवाल को जिम्मेदारी दी गई है। आयोग ने उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों के नेतृत्व में भी बदलाव किया है, जहाँ उत्तर 24 परगना में शशांक सेठी की जगह शिल्पा गौरीसरिया और दक्षिण 24 परगना में अरविंद कुमार मीणा के स्थान पर अभिषेक कुमार तिवारी को नियुक्त किया गया है।

उत्तरी पहाड़ी जिले दार्जिलिंग में सुनील अग्रवाल के स्थान पर हरिशंकर पाणिक्कर को तैनात किया गया है, वहीं अलीपुरद्वार में आर विमला को हटाकर टी बालसुब्रमण्यम को नया जिलाधिकारी-सह-डीईओ बनाया गया है। कोलकाता में केएमसी आयुक्त अंशुल गुप्ता के स्थान पर स्मिता पांडे को नियुक्त किया गया है, जो कोलकाता उत्तर के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में भी कार्य करेंगी, जबकि रणधीर कुमार को कोलकाता दक्षिण का डीईओ नियुक्त किया गया है।

आयोग ने निर्देश दिया है कि नवनियुक्त अधिकारी तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभालें और 19 मार्च को दोपहर 3:00 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरित किए गए अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी चुनाव संबंधी कार्य में नहीं लगाया जाएगा। राज्य प्रशासन पर बढ़ती निगरानी के बीच स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने यह सख्त कदम उठाया है।