0 66.9 लाख कैश और 37 किलो चांदी जब्त
धमतरी/रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने मंगलवार सुबह रायपुर, अभनपुर, धमतरी और कुरुद स्थित 8 अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, चांदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी को शिकायत मिली थी कि भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक 28 अप्रैल 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत छत्तीसगढ़ के अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद स्थित 8 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। यह तलाशी अभियान भारतमाला योजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले अवैध रूप से मुआवज़ा प्राप्त करने के मामले में चलाया गया। इस दौरान, 66.9 लाख रुपये कैश, 37.13 किलोग्राम वजन की चांदी की ईंटें और अन्य चांदी की वस्तुएं, डिजिटल उपकरण और विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। इसके अलावा कई लैपटॉप, मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क भी बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन डिजिटल उपकरणों में मुआवजा लेनदेन से जुड़े अहम दस्तावेज और कच्चा हिसाब-किताब मौजूद हो सकता है।
अफसरों से बदसलूकी, एफआईआर दर्ज
बता दें कि सोमवार को पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर देर रात तक छापेमारी की गई थी। साथ ही कुरूद में ही राइस मिलर रौशन चंद्राकर के यहां भी छापा मारा गया था। इसके अलावा अभनपुर में भी ईडी की टीम ने कारोबारी गोपाल गांधी और उसके भाइयों के घर दबिश दी थी। यहां रेड के दौरान अफसरों से बदसलूकी और धक्का-मुक्की की गई। डिप्टी डायरेक्टर की शिकायत पर अभनपुर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। अभनपुर टीआई सत्येंद्र श्याम ने एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की है।
पूर्व मंत्री के भाई के घर 15 घंटे जांच
अजय चंद्राकर के भाई के घर कार्रवाई की बात करें तो ईडी की टीम सोमवार सुबह करीब 6 बजे भूपेंद्र चंद्राकर के घर पहुंची थी। करीब 15 घंटे तक टीम जांच करती रही। करीब रात 1 बजे तक टीम कार्रवाई में जुटी रही, जिसके बाद वापस लौट गई। जांच के दौरान टीम अपने साथ दो थैलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज, जमीन से जुड़े कागजात, एक मोबाइल और लगभग 8 से 9 लाख रुपये कैश लेकर गई है।
शिकायतों के आधार पर ईडी की जांच
भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि घोषित कर उसका मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया। साथ ही एक ही खसरे की जमीन को कागजों में अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों के नाम पर भुगतान किया गया। ईडी इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के कई जिलों में छापेमारी कर करोड़ों की संपत्ति अटैच कर चुकी है।
कैसे हुआ घोटाला ?
भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर एनएचएआई को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। एसडीएम, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।