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0 इससे महंगाई बढ़ने का खतरा
मुंबई। भारतीय रुपया मंगलवार यानी 12 मई को डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर 95.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान के बाद रुपया में यह गिरावट आई है।

दरअसल, ट्रम्प ने ईरान के साथ संघर्ष विराम को कमजोर बताया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंड क्रूड ऑयल के दाम बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

इससे पहले सोमवार को यह 95.31 पर बंद हुआ था। पिछले हफ्ते ही रुपए ने 95.43 का निचला स्तर छुआ था, जो अब टूट चुका है। साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था।

रुपए में गिरावट के प्रमुख कारण
जियोपॉलिटिकल टेंशन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान के साथ संघर्ष विराम यानी सीजफायर को कमजोर बताने से खाड़ी देशों में तनाव बढ़ गया है। युद्ध या संघर्ष की आशंका से निवेशक उभरते बाजारों (जैसे भारत) से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ईरान संकट के कारण ग्लोबल मार्केट में सप्लाई में रुकावट आने का डर है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होता है।

बढ़ता व्यापार घाटा
जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो भारत का आयात बिल यानी इंपोर्ट बिल भी बढ़ जाता है। इससे देश का 'करेंट अकाउंट डेफिसिट' (सीएडी) बढ़ने की आशंका होती है, जो सीधे तौर पर रुपये की वैल्यू को कम करता है।

डॉलर की मजबूती
वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में 'अमेरिकी डॉलर' को सबसे सुरक्षित संपत्ति यानी सेफ हेवन माना जाता है। ट्रम्प के कड़े रुख के बाद दुनिया भर के बाजारों में डॉलर की डिमांड बढ़ गई है, जिससे रुपये सहित अन्य करेंसी दबाव में हैं।

विदेशी निवेशकों की निकासी
वैश्विक जोखिम बढ़ने पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना निवेश निकालकर डॉलर में वापस ले जाते हैं। बाजार से डॉलर बाहर जाने के कारण रुपए की कीमत गिर जाती है।