नई दिल्ली। भारत और साइप्रस ने द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक उन्नत करने के साथ-साथ रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत छह क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किये और संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में आठ घोषणाएं भी की।
भारत की तीन दिन की यात्रा पर आये साइप्रस के राष्ट्रपति महामहिम निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स के साथ शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की द्विवपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के बीच जिन छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए उनमें आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की स्थापना, वर्ष 2026-2031 के लिए रक्षा सहयोग रोडमैप, साइप्रस के अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल नीति उप मंत्रालय तथा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच नवाचार और प्रौद्योगिकी सहयोग संबंधी समझौता शामिल है। भारत और साइप्रस ने साइबर सुरक्षा संवाद और कांसुलर संवाद शुरू करने पर भी सहमति जताई, जबकि साइप्रस के लारनाका संयुक्त बचाव समन्वय केंद्र और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच खोज एवं बचाव सहयोग को लेकर तकनीकी व्यवस्था पर भी हस्ताक्षर किये गये।
यात्रा के दौरान कूटनीतिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान, तथा वर्ष 2026-2030 के लिए सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े समझौते भी किए गए। एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कदम के तहत साइप्रस ने "व्यापार, संपर्क और समुद्री परिवहन" स्तंभ के अंतर्गत भारत की हिन्द प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की घोषणा की।
भारत ने साइप्रस को "भारत स्वास्थ्य पहल सहयोग, हित एवं मैत्री (भीष्म) क्यूब" उपहार स्वरूप देने की घोषणा की। दोनों देशों ने 18 मई को पहली बार "भारत-साइप्रस अंतरिक्ष दिवस" मनाकर अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को भी रेखांकित किया। इसके साथ ही साइप्रस ने व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मुंबई में "साइप्रस ट्रेड सेंटर" खोलने की मंशा जाहिर की।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स की इस यात्रा को भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक, प्रौद्योगिकी और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।