नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय से 'सनातन धर्म विध्वंसक और घुसपैठिया संरक्षक इंडिया गठबंधन' का वास्तविक चरित्र सामने आ गया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय ने संविधान सम्मत और चुनाव आयोग के अधिकार के अंतर्गत माना है। इसके साथ ही निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए इसे आवश्यक माना है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि राजनीतिक पराजय के बाद और देश में अराजकता-अव्यवस्था उत्पन्न करने की नैतिक पराजय के बाद अब यह विपक्ष और कांग्रेस की संवैधानिक धरातल पर भी पराजय हुई है।
लोकतंत्र की समस्त संस्थाओं को अपनी राजनीतिक अक्षमता को ढकने के लिए आरोपित करने और लांछित करने के सभी कुप्रयास आज न्यायालय के धरातल पर निष्फल सिद्ध हुए।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में निर्णायक और करारी हार के बाद और देश में अराजकता भड़काने की उनकी (कांग्रेस की) नापाक साज़िश के बावजूद कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर यह एक नैतिक हार है। अब शीर्ष अदालत में एसआईआर पर उनकी याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। इसे संवैधानिक हार कहा जा सकता है। उच्चतम न्यायालय के इस फैसले ने विपक्ष खास तौर पर कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पूरी हार को राजनीतिक, संवैधानिक और नैतिक हार के रूप में सारांशित किया है।"
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय से एसआईआर विरोध के नाम पर भ्रम फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है। श्री गांधी और इंडिया गठबंधन जिस एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार देश में भ्रम और राजनीति फैलाने की कोशिश कर रहे थे, उस पर अब देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट रुख रख दिया है।
उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ़ यह नहीं है कि एसआईआर के ख़िलाफ़ लगाया गया आरोप बेबुनियाद साबित हुआ। यह विषय उससे कहीं ज़्यादा गंभीर है। आज विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस का अनुबंध चीन के साथ है। उनका परिवार इटली में है। उनकी सोच का केंद्र इंग्लैंड और यूरोप में है, उनके दुष्प्रचार का केंद्र अमेरिकी संस्थाओं में है, और उनके वोटों का प्रवाह बंगलादेश से जुड़ा हुआ है। इसलिए यह फैसला और महत्वपूर्ण है।