Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 बागी सांसद बंगाल भाजपा प्रभारी और लोकसभा स्पीकर से मिले
0 काकोली बोलीं- एनडीए को हमारा समर्थन

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों वाले बागी गुट का विलय अब त्रिपुरा की बंगाली-समर्थक नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (एनसीपी) में होगा। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी गुट के सांसदों ने रविवार शाम को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें विभिन्न मांग संबंधी पत्र सौंपा। 

स्पीकर श्री बिरला से मुलाकात की जो फोटो सामने आई है, उसमें 17 सांसद दिख रहे हैं। इससे पहले इन सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की थी।

जानकारी के मुताबिक बागी गुट के सांसदों ने स्पीकर श्री बिरला को सौंपे गए पत्र में कई मांग रखी गई है। इनमें टीएमसी के बागी सांसदों ने स्पीकर से संसद में अलग बैठने की जगह देने की मांग की है।  बागी गुट की काकोली घोष के मुताबिक, नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी एनडीए को समर्थन देगी। काकोली के अनुसार, बागी गुट के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है। वहीं ममता बनर्जी गुट ने स्पीकर को पत्र देकर अलग गुट को मान्यता न देने की मांग की सुदीप बंद्योपाध्याय के अनुसार, असली टीएमसी और चुनाव चिह्न पर विवाद अब अदालत तक पहुंच सकता है।

एनसीपी त्रिपुरा का छोटा दल, किसने बनाया यह साफ नहीं
एनसीपी का पूरा नाम नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया है। यह त्रिपुरा की एक छोटी राजनीतिक पार्टी है। यह पार्टी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है, लेकिन मान्यता प्राप्त नहीं है।एनसीपी के फाउंडर कौन हैं या इसका गठन कब हुआ, इससे जुड़ी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। पार्टी की पहचान मुख्य रूप से बंगाली समुदाय और क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़ी बताई जाती है।

बागी गुट ने 22 सांसदों के समर्थन का किया दावा 
तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने रविवार को दावा किया कि लोकसभा में उनकी संख्या बढ़कर 22 सांसदों की हो गयी है और कहा है कि वे सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संपर्क कर एक अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। तृणमूल की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार सुबह असंतुष्ट खेमे की बैठक में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली रवाना होते समय यह दावा किया।उन्होंने कहा कि जिस समूह ने पहले 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया था, अब उसमें दो और सांसद शामिल हो गये हैं, जिनके नामों का खुलासा उनके औपचारिक रूप से गुट में शामिल होने के बाद किया जायेगा। सुश्री काकोली ने कोलकाता हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा कि हम एक बैठक के लिए दिल्ली जा रहे हैं। हमारे साथ 22 सांसद हैं।"उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने सोमवार का वक्त दिया है, जब वे औपचारिक रूप से संसद में अलग गुट के रूप में मान्यता की मांग करेंगे। बागी खेमे के सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में कोलकाता में तय की गयी बैठक को नयी दिल्ली में बुलाया गया है। रिपोर्टों में अंदेशा जताया गया था कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बैठक में शामिल हो सकते हैं, लेकिन माना जा रहा है कि वह दीघा-शंखरपुर विकास प्राधिकरण के एक आधिकारिक कार्यक्रम के कारण वहीं रुक गये हैं। सुश्री माला रॉय, सुश्री सायानी घोष, सुश्री जून मलिया, श्री देव, श्री बापी हलदार और प्रसून बनर्जी समेत कई बागी सांसद रविवार को दिल्ली पहुंचे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद से यह बगावत और तेज हो गयी है। पार्टी के भीतर का संकट पिछले हफ्ते लोकसभा संसदीय दल में उस समय खुलकर सामने आ गया, जब तृणमूल के अधिकतर सांसद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नियंत्रण से बाहर जाते दिखे। पिछले हफ्ते, बागी खेमे ने करीब 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया था और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन देने की इच्छा जतायी थी। इसी बीच, शुक्रवार को तृणमूल के 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज सामने आये थे।

बागी गुट में शामिल होने वाले सांसद 
रिपोर्टों के मुताबिक, हस्ताक्षर करने वाले सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से सुश्री काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में उन्हें एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। इस सूची में सुश्री शताब्दी रॉय, सुश्री शर्मिला सरकार,  जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया,   असित मल,  अरूप चक्रवर्ती,  कालीपद सोरेन,  पार्थ भौमिक,  खलीलुर रहमान,  अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान और मिताली बाग और अन्य सांसद शामिल थे। बताया जा रहा है कि  रचना बनर्जी और सायानी घोष के हस्ताक्षर बाद में जोड़े गये। बागी खेमे को शनिवार को उस समय और ताकत मिली, जब तृणमूल के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को दिल्ली में बागी नेता  शताब्दी रॉय के साथ यात्रा करते देखा गया, जिससे इन अटकलों को हवा मिली कि वह भी असंतुष्ट समूह में शामिल हो गये हैं।

 

tranding