0 4 साल पहले शिंदे 39 विधायकों के साथ अलग हुए थे
0 अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ इसकी पुष्टि नहीं की गई है
नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था। इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी।
राउत ने कहा कि ये साले ... ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।
सांसदों को 50-50 करोड़ ऑफर, चार्टर्ड से दिल्ली आए
राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपए ऑफर हुए हैं। राउत ने कहा- मेरे पास जानकारी है कि सांसदों को 15-15 करोड़ रुपए पहुंचाए गए हैं और उन्हें 3 चार्टर्ड विमानों से दिल्ली लाया गया है। राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से सिर्फ 3 सांसद, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को खुद सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए।
परिसीमन बिल गिरने के कारण ऐसी राजनीति आपत्तिजनक
संजय राउत ने लोकसभा में परिसीमन बिल गिरने के कारण भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- अगर परिसीमन बिल पास नहीं हुआ तो क्या देश पर आसमान टूट पड़ेगा? सभी दलों की सहमति बनने के बाद इसे फिर लाया जा सकता था।राउत ने कहा कि बिल पारित नहीं होने के बाद भाजपा जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां कर रही है, वह बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष को कमजोर करने के लिए दल-बदल को बढ़ावा दे रही है।
उद्धव अपने सांसदों के जाने की वजह खुद तलाशेंः बावनकुले
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना (यूबीटी) में टूट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने वाले आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के सांसद कहां जाते हैं, इससे भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। उद्धव ठाकरे को खुद सोचना चाहिए कि उनके सांसद और विधायक उन्हें छोड़कर क्यों जा रहे हैं। बावनकुले ने कहा कि अगर सांसद एकनाथ शिंदे के साथ जा रहे हैं, तो यह शिंदे और उद्धव का आंतरिक मामला है। भाजपा या उसके किसी नेता का इससे कोई संबंध नहीं है। संजय राउत के पैसों के लेन-देन वाले आरोपों पर उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत है कि कोई सांसद या विधायक पैसे के लिए दल बदलता है।