नई दिल्ली। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने बुधवार को यहां क्रमश: वायु सेना और थल सेना के उप प्रमुख का पदभार ग्रहण किया। इसके अलावा एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख तथा लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में पदभार ग्रहण किया।
एयर मार्शल दीक्षित को छह दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, रक्षा स्टाफ सर्विस कॉलेज (बंगलादेश) तथा राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज से जुड़े रहे हैं और उन्हें 3,500 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करण, एचपीटी-32, एएन-32, एवरो, किरण, जगुआर, आईएल-78, हॉक और तेजस सहित अनेक प्रकार के विमान उडाने का अनुभव है। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं। लगभग चार दशकों के अपने विशिष्ट सेवाकाल के दौरान एयर मार्शल दीक्षित ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक, कोप-इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर सहित कई प्रमुख अभियानों एवं सैन्य अभ्यासों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व कैडेट छात्र लेफ्टिनेंट जनरल जैन जून 1988 में महार रेजिमेंट में शामिल हुए थे। लगभग चार दशकों की विशिष्ट सेवा के दौरान, उन्होंने विभिन्न परिचालन परिवेशों में कमान और स्टाफ के कई पदों पर कार्य किया है। उन्होंने अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र में इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभाली साथ ही दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, उन्होंने स्ट्राइक कोर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स और उत्तरी कमान में एक पिवट कोर की कमान भी संभाली है। उनकी सेवाओं में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा और नियंत्रण रेखा तथा उत्तर पूर्व में उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों और आतंकवाद विरोधी अभियानों का अनुभव शामिल हैं। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में एक सेक्टर की कमान भी संभाली है।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज से जुड़े रहे एयर मार्शल तेजिंदर सिंह 13 जून, 1987 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए। वह श्रेणी 'ए' के योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं और उन्हें 4,500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। उन्होंने एक फाइटर स्क्वाड्रन, एक रडार स्टेशन, एक प्रमुख फाइटर अड्डे की कमान संभाली है और जम्मू-कश्मीर के एयर ऑफिसर कमांडिंग भी रह चुके हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्कर को दिसंबर 1988 में 74 बख्तरबंद रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त हुए थे। जनरल ऑफिसर का चार दशकों से अधिक का गौरवशाली और विशिष्ट सैन्य करियर रहा है। अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने विभिन्न भौगोलिक और संचालन संबंधी परिवेशों में कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी कई पदों पर कार्य किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान द्वितीय कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में उन्होंने निर्णायक नेतृत्व और रणनीतिक दूरदर्शिता का परिचय दिया।