नई दिल्ली। लोकसभा में मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को भी विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा, जिसके कारण दो बार के स्थगन के बाद पीठासीन अधिकारी जगदम्बिका पाल ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
दो बार के स्थगन के बाद जब दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू की तो विपक्षी सदस्य हंगामा करते हुए सदन के बीचोंबीच आ गए और पिछले सप्ताह की तरह नारेबाजी करने लगे। पीठासीन अधिकारी ने सदस्यों से हंगामा नहीं करने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने का आग्रह किया।
इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल सत्र के पहले दिन से ही संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे हैं और विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी यही मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर बयान देने के लिए तैयार हैं और सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के बाद श्री शाह के जवाब के लिए भी तैयार है।
पीठासीन अधिकारी ने कहा कि जब संसदीय कार्य मंत्री कह रहे हैं कि गृह मंत्री बयान देने के लिए तैयार हैं तो सभी सदस्यों को अपनी सीटों पर जाना चाहिए और सदन में व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब गृह मंत्री चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं और सरकार भी चर्चा चाहती तो सदन को चलने दिया जाना चाहिए।
हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को 'अधिकरण सुधार विधेयक, 2026' सदन में पारित कराने के लिए पेश करने को कहा। श्री मेघवाल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह किसी अधिकरण के क्षेत्राधिकार में बदलाव नहीं करता, बल्कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
श्री जगदम्बिका पाल ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेने के लिए कई सदस्यों के नाम पुकारे, लेकिन हंगामे के कारण किसी सदस्य की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने विधेयक को सदन में पारित करने के लिए रखा और हंगामे के बीच विधेयक को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
पीठासीन अधिकारी ने सदस्यों से अपनी सीटों पर जाने और सदन की व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया, लेकिन हंगामा जारी रहने पर उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।