Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के बजाय शुरूआत के दो अंतरे गाये जाने के निर्णय को असंवैधानिक, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय करार देते हुए कहा है कि यह राजनैतिक दृष्टि से भविष्य में गंभीर संकट को पैदा करने वाला है।

रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट में इस निर्णय पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि संसद से पारित कोई भी कानून हर व्यक्ति के लिए बाध्यकारी होता है। यदि कोई कानून को नहीं मानता है तो संविधान के प्रति उनकी निष्ठा संदेह के घेरे में आ जाती है और उनकी देशभक्ति पर सवालिया निशान है।

श्री सिंह ने कहा, "कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् का सम्मान करने से औपचारिक रूप से न केवल इंकार करना, बल्कि सीधे-सीधे विरोध करना, अत्यंत दुर्भाग्य जनक और संवैधानिक दृष्टि से बहुत गंभीर विषय है। भारत के संविधान के अनुसार, संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और संसद से पारित कोई भी क़ानून हर व्यक्ति के लिये बाध्यकारी है। यदि कोई इसे मानने से मना करता है तो निश्चित रूप से संविधान के प्रति उनकी निष्ठा संदेह के घेरे में आ जाती है और यदि राष्ट्र गीत का सम्मान करने से कोई मना करता है, तो उसकी देशभक्ति पर भी सवालिया निशान लग जाता है।"

रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस 1937 के जिस प्रस्ताव की बात करती है, वह कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की कट्टरपंथी मांगों के आगे नतमस्तक होकर पारित किया था और उसका ख़ामियाज़ा भविष्य में देश को विभाजन के रूप में देखना पड़ा। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी तत्वों के आगे समझौता करना, हमेशा देश के लिए घातक साबित हुआ है और आज कांग्रेस जब कट्टरपंथी तत्वों के आगे उसी प्रकार समर्पण कर रही है, तो यह देश के भविष्य के लिए गंभीर खतरे के संकेत हैं।

उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि कांग्रेस का यह निर्णय सवर्था असंवैधानिक और निंदनीय है साथ ही राजनैतिक दृष्टि से भविष्य में एक गंभीर संकट को पैदा करने वाला है। वंदे मातरम का विरोध करके कांग्रेस ने अपने नासमझी भरे खतरनाक इरादों को देश के सामने बता दिया है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस कार्यसमिति की हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का पूर्ण गायन नहीं करेगी और पहले की तरह केवल शुरूआत के दो अंतरे ही गाये जायेंगे।

सरकार ने मानसून सत्र में विधेयक पारित कर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को राष्ट्र गान के समान दर्जा देते हुए इसका अपमान करने वाले के लिए सजा तथा दंड का प्रावधान किया है।