वॉशिंगटन। अमेरिका ने एक बार फिर कहा है कि वह दुनियाभर में लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए काम करता रहेगा। कई देशों में लोगों व धर्मस्थलों पर हमलों को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने यह बात कही। रिपोर्ट में भारत में धर्मस्थलों पर बढ़ते हमलों को लेकर निशाना साधा गया है तो अल्पसंख्यकों व महिलाओं पर हमलों को लेकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन की आलोचना की गई है।
विश्व में धार्मिक आजादी पर सालाना अमेरिकी रिपोर्ट (International Religious Freedom report 2022 ) जारी करने के मौके पर गुरुवार को वॉशिंगटन में मीडिया से चर्चा में ब्लिंकन ने कहा कि लोगों की धार्मिक आजादी की रक्षा के लिए अमेरिका हमेशा खड़ा है। हम अन्य देशों की सरकारों, बहुदेशीय संगठनों, सिविल सोसायटी के साथ इस दिशा में काम करेंगे। अगले माह ब्रिटेन में धार्मिक आजादी को लेकर होने वाले मंत्रियों के सम्मेलन में भी इस पर विचार होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत में भी लोगों व धर्मस्थलों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिंतित है। एशियाई देशों खासकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों और महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे दुनिया भर के समुदायों में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकार खतरे में हैं।
चीन कर रहा अन्य धर्मों के लोगों को परेशान
उन्होंने कहा चीन उन अन्य धर्मों के अनुयायियों को परेशान करना जारी रखे हुए है, जिन्हें वह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ मानता है। इनमें तिब्बती बौद्ध, फालुन गोंग, बौद्ध, ईसाई, इस्लामी और ताओवादी पूजा के घरों को नष्ट करना और ईसाइयों, मुसलमानों के लिए रोजगार और आवास के लिए बाधाएं खड़ी करना शामिल है।
तालिबान कर रहा महिलाओं का दमन
ब्लिंकन ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के कार्यकाल में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति खराब हो गई है। खासकर महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा व अन्य मूल अधिकारों पर धर्म के नाम पर नकेल कसी जा रही है। वहीं, आईएसआईएस-खुरासान धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर शिया हजारा के खिलाफ तेजी से हिंसक हमले कर रहा है।
पाकिस्तान में ईश निंदा पर मौत की सजा
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन ने कहा कि पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में कम से कम 16 व्यक्तियों को 2021 में पाकिस्तानी अदालतों ने मौत की सजा सुनाई। हालांकि, इनमें से किसी को भी सजा दी नहीं गई है।