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डीजीपी दिलबाग बोले- टारगेट किलिंग में शामिल 47 मॉड्यूल तबाह किए

बेंगलुरु/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर तालिब हुसैन को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया है। 17 राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस को जॉइंट ऑपरेशन में यह सफलता मिली। हिजबुल मुजाहिदीन ने किश्तवाड़ इलाके में नए सिरे से भर्ती करके अपने कैडर को फिर से संगठित करना और मजबूत करना शुरू कर दिया था।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि तालिब किश्तवाड़ में काफी समय से एक्टिव था। वह आजकल बेंगलुरु में छिपा था। हमारी टीमें वहां गईं और इसे पकड़कर लाईं। इसका पकड़ा जाना बड़ी कामयाबी इसलिए है क्योंकि राजौरी-पुंछ में यह आतंकी दोबारा सक्रिय होने लगा था। तालिब के अरेस्ट होने के बाद वहां अमन रहेगा।

पिछले दिनों हुई टारगेट किलिंग की घटनाओं पर दिलबाग सिंह ने कहा- माहौल शांत हो रहा है। टारगेट किलिंग के पीछे जो लोग हैं उनकी पहचान हो चुकी है, उन पर कार्रवाई होनी है। जो आतंकी मॉड्यूल्स हैं उन पर कार्रवाई हो रही है। अब तक ऐसे 47 मॉड्यूल्स पर कार्रवाई की है। जो सिलेक्टिव किलिंग में शामिल थे, एक्टिवली शामिल थे उनमें से ज्यादातर मारे जा चुके हैं। जो कोर सेक्टर में थे जैसे वैपन पहुंचाना, वारदात के बाद बाइक पर भागने में मदद करना। साल के पिछले 5 महीनों के दौरान 47 मॉड्यूल तबाह किए हैं। इस तरह के और लोगों की पहचान जारी है। उन पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खुलेआम हथियार लेकर घूमता था तालिब
5 बच्चों का पिता तालिब गुर्जर हिजबुल में शामिल होने के बाद अक्सर किश्तवाड़ जिले के मारवाह और दछन के ऊपरी इलाकों में हथियारों के साथ घूमते देखा जाता था। इसके साथ इलाके में सक्रिय कुछ अन्य आतंकवादी भी नजर आते थे। नागसेनी ​​​​​​​तहसील में राशगवारी ​​​​​​​के रहने वाले तालिब के परिवार ने कई बार पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और तालिब को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटाने के लिए मदद मांगी थी।

2016 से ही निशाने पर था तालिब
किश्तवाड़ जम्मू का एकमात्र जिला है, जहां हिजबुल आतंकवादियों की गतिविधियां आए दिन सुर्खियों में रहती हैं। तालिब हुसैन सबसे ज्यादा वक्त तक जिंदा रहने वाला आतंकी है। वह 2016 से आतंकी गतिविधियों में शामिल था। तालिब गुर्जर एक स्थानीय गुर्जर जनजाति से ताल्लुक रखता है, जो यहां के पहाड़ी रास्तों से परिचित है।

2016 में तालिब गुर्जर रहस्यमय तरीके से गायब हो गया था। कुछ महीने बाद पता चला कि वह आतंकी रैंक में शामिल हो गया है। तभी से सुरक्षा बल उसके पीछे लगे थे। लेकिन हर बार वह चकमा दे देता था। तालिब को सक्रिय आतंकवादी घोषित करने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।

कश्मीर में बैंक मैनेजर के बाद प्रवासी मजदूर को भी मारा था

कश्मीर में टारगेट किलिंग के तहत पिछले गुरुवार को राजस्थान के रहने वाले एक बैंक मैनेजर की हत्या के बाद देर रात आतंकियों ने बडगाम में दो गैर कश्मीरियों पर भी गोलियां बरसाईं थीं। इसमें बिहार के रहने वाले दिलखुश की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वहीं पंजाब निवासी गोरिया की हालत स्थिर थी।