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नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट में डिप्टी स्पीकर की भूमिका पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। एकनाथ शिंदे गुट की ओर से 15 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के नोटिस के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर के रोल पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि बागी विधायकों ने उनके ही खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था तो कैसे उन्हें नोटिस जारी किया गया। जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल किया कि अपने खिलाफ दायर अर्जी पर कैसे डिप्टी स्पीकर खुद ही जज बन गए। इस पर डिप्टी स्पीकर की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने कहा कि उनके खिलाफ जो नोटिस आया था, वह अनवेरिफाइड ईमेल से भेजा गया था। 

अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर की ओर से पेश वकील राजीव धवन से सवाल किया कि यदि विधायकों की ओर से नोटिस मिला था तो फिर उसे खारिज क्यों किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने खिलाफ मामले में उन्होंने कैसे खुद ही सुनवाई की और खुद ही जज बन गए। इसके साथ ही अदालत ने डिप्टी स्पीकर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस, शिवसेना विधायक दल के नए नेता अजय चौधरी और चीफ व्हिप बनाए गए सुनील प्रभु को भी नोटिस जारी किया है।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया है और पूछा है कि ऐसे मामलों में आखिर संसद के नियम क्या कहते हैं। अदालत ने सभी पक्षों से 5 दिनों के अंदर नोटिस का जवाब मांगा है। यही नहीं इन पक्षों की ओर से नोटिस का जवाब मिलने के बाद एकनाथ शिंदे गुट को आदेश दिया गया है कि वे तीन अंदर इस पर प्रत्युत्तर दें। यही नहीं अदालत ने कहा है कि अब अगली सुनवाई 11 जुलाई को गर्मी की छुट्टियों के बाद होगी।