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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताते हुए कहा है कि इसका इस्तेमाल करते समय इसके दुरूपयोग के प्रति भी अत्यधिक सावधान रहने की जरूरत है।

श्री सिंह ने सोमवार को यहां रक्षा मंत्रालय द्वारा ‘रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह मानवता के विकास में एक बड़ा तथा क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा , “ आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए कोई जगह नहीं है। चिकित्सा, कृषि तथा अन्य क्षेत्रों में इसका जिस तरह से बोलबाला है अब रक्षा क्षेत्र में भी इसके बलबूते बड़े बदलाव हो रहे हैं। अब ऐसे हथियार भी विकसित किये जा चुके हैं जो मनुष्य के नियंत्रण के बिना भी बखूबी मिशन को अंजाम दे सकते हैं। सैन्य प्रशिक्षण और सिमुलेशन को भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बेहतर बनाया जा रहा है। ”

रक्षा मंत्री ने रुस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि जो इस क्षेत्र में ‘लीडर’ बनेगा वह दुनिया पर राज करेगा। श्री सिंह ने कहा कि जिस तरह से इस क्षेत्र में संभावनाएं दिख रही हैं इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता । उन्होंने कहा, “ भारत दुनिया पर राज नहीं करना चाहता लेकिन कोई देश हमारे ऊपर आकर राज करने की ना सोचने लगे इसके लिए हमें अपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता विकसित करनी ही पड़ेगी। इसलिए आप सब इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास की दिशा में आगे बढे। ”

उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में देखते हुए सरकार देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल सुरक्षा की दृष्टि से फायदा होगा लेकिन इस प्रौद्योगिकी का असैन्य क्षेत्र को भी बहुत लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के साथ हमें भी अपना रक्षा एवं सुरक्षा के साथ साथ मानवता की रक्षा के बारे में भी सोचने की जरूरत है। साथ ही हमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित आचार संहिता तथा खतरों के बारे में भी शुरू से ही सोचने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इसके विकास को रोका नहीं जाना चाहिए लेकिन इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतने की जरूरत है। आशंकाओं से चिंतित होने के बजाय उनका अभी से ध्यान रखने की जरूरत है। इसका दुरूपयोग नहीं होना चाहिए और बड़ी सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए जिससे कि आने वाले समय में यह हमारे हाथों से नहीं निकल जाये। मानवता के कल्याण, शांति इस पर परमाणु हथियारों की तरह किसी एक देश या समूह का एकाधिकार न हो जाये और बाकी लोग इससे वंचित रह जायें। ”