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नयी दिल्ली/विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से पुनः जुड़ने का निर्णय किया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी से चर्चा के बाद राज्य सरकार ने महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) से पुनः जुड़ने का निर्णय लिया है। श्री तोमर ने राज्य सरकार के इस कदम की सराहना की है।

इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के 40 लाख से अधिक किसानों की फसलों को प्राकृतिक आपदा की स्थिति में बीमा सुरक्षा कवच मिलेगा।
श्री तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों के सुझाव अनुसार पीएमएफबीवाई को सरल और सुविधाजनक बनाया है। केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर किसानों की स्थिति सुधारते हुए उन्हें समृद्ध बनाने और कृषि को उन्नत खेती के रूप में बदलने के लिए निरंतर काम कर रही है।
श्री रेड्डी ने राज्य में पीएमएफबीवाई को फिर से लागू करने को लेकर केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया है। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से चर्चा के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के किसानों को पीएमएफबीवाई से जोड़ना तय किया है।

आंध्र ने खरीफ-2022 सीजन से पीएमएफबीवाई को लागू करने का निर्णय है। केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश सहित देशभर के किसानों को उनकी आय- आजीविका सुरक्षित करके सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आंध्र प्रदेश एवं अन्य राज्यों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा फरवरी-2020 में इस योजना को नया रूप देते हुए नई सुविधाओं, जैसे- सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक नामांकन, उपज अनुमान में प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग, जोखिम कवरेज चुनने के लिए राज्यों को विकल्प एवं प्रचलित जोखिम प्रोफाइल के अनुसार बीमा राशि का भुगतान, प्रशासनिक खर्चों के लिए तीन प्रतिशत का प्रावधान किया गया।

गत सात जुलाई को केंद्रीय कृषि सचिव मनोज अहूजा की अध्यक्षता में एक टीम ने मुख्यमंत्री के समक्ष योजना को लेकर एक प्रेजेंटेशन भी दिया था।
आंध्र प्रदेश में पीएमएफबीवाई और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) का खरीफ-2016 से खरीफ-2019 तक सफलतापूर्वक कार्यान्वयन हुआ है।

आज की बैठक में आंध्र की विशेष मुख्य सचिव पूनम मालकोंडइया, केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिलक्ष लिखी ने भी संबोधित किया। योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संयुक्त सचिव रितेश चौहान ने स्वागत भाषण और प्रेजेंटेशन दिया। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।