नई दिल्ली/कोलकाता। उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की एकजुटता को बड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के निवास स्थल पर पार्टी के समस्त लोकसभा व राज्यसभा सदस्यों के साथ बैठक के बाद सीएम के भतीजे और तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि टीएमसी उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगी। एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को समर्थन देने का सवाल ही नहीं है। हम जानते हैं कि जगदीप धनखड़ जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे तो कैसे थे। उन्होंने बंगाल के लोगों और मुख्यमंत्री पर अलग-अलग तरह से हमला किया। इसलिए हम किसी भी कीमत पर एनडीए उम्मीदवार के साथ नहीं जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक तरीके से टीएमसी को लूप में रखे बिना ही विपक्ष के उम्मीदवार का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों में 35 सांसदों वाली पार्टी के साथ उचित परामर्श और विचार-विमर्श के बिना जिस तरह से विपक्षी उम्मीदवार का फैसला किया गया था, ऐसे में हमने सर्वसम्मति से मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है। टीएमसी महासचिव ने कहा कि हमने कुछ नामों का प्रस्ताव दिया था और वे परामर्श से थे, लेकिन नाम हमारे परामर्श के बिना तय किया गया था। हालांकि, विपक्षी एकता राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव के मापदंड पर निर्भर नहीं करती है। मार्गरेट अल्वा के साथ ममता बनर्जी के बहुत अच्छे समीकरण हैं, लेकिन व्यक्तिगत समीकरण कोई मायने नहीं रखता। इस बीच जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने से ठीक पहले ममता बनर्जी ने असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा के साथ दार्जिलिंग गवर्नर हाउस में उनके साथ तीन घंटे की बैठक की थी।
शरद पवार ने की थी उम्मीदवारी की घोषणा
पिछले रविवार को 17 विपक्षी दलों की बैठक के बाद कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा की उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा था कि आप और तृणमूल कांग्रेस भले ही बैठक में नहीं आयी हों, मगर दोनों पार्टियां अल्वा का समर्थन करेंगी। शरद पवार ने झामुमो के भी उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ होने की बात कही थी।
विपक्षी खेमे की एकजुटता में दरार
उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त विपक्ष की उम्मीदवार के रूप में मार्गरेट अल्वा ने पिछले मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया था। हालांकि, अल्वा के नामांकन के समय तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं की गैरमौजूदगी साफ इशारा कर रही है विपक्षी खेमे की एकजुटता में दरार है। इस मौके पर कांग्रेस के नेताओं राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अधीर रंजन चौधरी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, माकपा नेता सीताराम येचुरी, सपा नेता रामगोपाल यादव, राजद के मनोज झा, शिवसेना के संजय राउत समेत कई अन्य विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे। संसद भवन में निर्वाचन अधिकारी लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह के समक्ष मार्गरेट अल्वा ने अपना नामांकन दाखिल किया। वैसे टीएमसी और आप विपक्षी खेमे के उम्मीदवार को वोट करती भी हैं तो भी एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ की उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत तय है।
एनडीए के पास संसद में पर्याप्त संख्या बल
ज्ञात हो कि एनडीए-भाजपा के पास लोकसभा और राज्यसभा में पर्याप्त संख्या बल है। उपराष्ट्रपति चुनाव में वाइएसआर कांग्रेस, बीजेडी, अन्नाद्रमुक आदि ने भी जगदीप धनखड़ का समर्थन करने की घोषणा पहले ही कर दी है। जबकि विपक्षी दलों के उपराष्ट्रपति चुनाव में एकजुट होने के शरद पवार के बयान के विपरीत तृणमूल कांग्रेस और आप अल्वा के नामांकन के महत्वपूर्ण मौके पर नहीं आयीं। इतना ही नहीं, इन दोनों दलों के किसी सांसद ने अल्वा के प्रस्तावक और अनुमोदक के रूप में हस्ताक्षर नहीं किए हैं। अब तृणमूल कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं लेने का फैसला किया है।