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नई दिल्‍ली। महंगाई और जरूरी वस्‍तुओं की बढ़ी कीमतों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध सोमवार को टूटता नजर आया। केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी की बढ़ी हुई दरों और महंगाई के मुद्दे पर जवाब दिया। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमें देखना होगा कि दुनिया में क्या हो रहा है। दुनिया ने ऐसी महामारी का सामना पहले कभी नहीं किया। इससे बाहर आने के लिए हर कोई अपने स्तर पर काम कर रहा है।  

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पिछले दो साल में विश्व बैंक, आईएमएफ (IMF) और दूसरी वैश्विक संस्थाओं की ओर से कई बार दुनिया की विकास दर और भारत की विकास दर के बारे में आकलन किए गए हैं। हर बार जब भी आकलन किया गया है, तब दुनिया की विकास दर उस अवधि में अनुमान से कम रही है, यहां तक कि भारत की भी विकास दर अनुमान से कम रही है, लेकिन हर बार भारत की विकास दर सर्वाधिक रही है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में जीएसटी संग्रह पिछले 5 महीनों से लगातार 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। 8 इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में जून में डबल डिजिट में बढ़ोतरी हुई है। जून में कोर सेक्टर में वार्षिक दर से 12.7 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत सकारात्मक संकेत दिखा रही है।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि हमें यह भी देखना होगा कि दुनिया में क्या हो रहा है। दुनिया ने ऐसी महामारी का सामना पहले कभी नहीं किया था। महामारी से बाहर आने के लिए कोशिशें की जा रही हैं। रूस-यूक्रेन संकट, चीन के कई हिस्सों में लॉकडाउन, कोरोना की लहरें और ओमिक्रोन आदि के चलते अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ है, इसके बावजूद हम महंगाई को 7 फीसद से नीचे रखने की कोशिश कर रहे हैं।
 
निर्मला सीतारमण ने कहा कि अमेरिका की GDP में दूसरी तीमाही में 0.9 फीसद की गिरावट दर्ज की गई और पहली तिमाही में 1.6 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी। इसको उन्होंने अनौपचारिक मंदी का नाम दिया। रही बात भारत की तो यहां मंदी या महंगाई जनित मंदी का सवाल ही नहीं उठता है। ब्लूमबर्ग की सर्वे रिपोर्ट में साफ साफ कहा गया है कि भारत में मंदी की संभावना शून्‍य है।
 
वित्‍त मंत्री ने कहा कि भारत में 2022 में सकल NPA छह साल में सबसे निचले स्तर 5.9 फीसद पर है। आप यदि दूसरे मुल्‍कों पर नजर डालें तो ऐसा नहीं है। चीन को ही देखें। चीन के 4000 बैंक दिवालिया होने के कगार पर हैं लेकिन भारत में NPA कम हो रहे हैं। केंद्र सरकार के प्रयासों के चलते सरकार पर कर्ज GDP का 56.9 फीसद है। IMF के आंकड़ों के अनुसार भारत दूसरे देशों की तुलना में काफी अच्छी स्थिति में है। भारत सरकार पर औसतन कर्ज GDP का 86.9 फीसद है।