0 सड़क पर सीमेंट के बैरिकेड्स लगाए
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार से किसान संगठनों ने आंदोलन शुरू करने वाले हैं। किसानों का शहर में पहुंचना शुरू हो गया है। इसके चलते पुलिस ने दिल्ली-हरियाणा टिकरी बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। साथ ही सड़क पर सीमेंट के बैरिकेड्स लगा दिए हैं।
इससे पहले, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने अपनी लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 75 घंटे का धरने दिया। इसमें पंजाब समेत अन्य राज्यों से करीब 50 हजार किसान धरना स्थल पहुंचे थे। एसकेएम में लगभग 40 कृषि संगठन शामिल हैं, जो मुख्य रूप से फसलों के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी) पर गारंटी कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। इसमें भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
तिकुनिया इलाके में भड़की हिंसा में 8 की मौत
बता दें कि पिछले साल 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया इलाके में हिंसा भड़की थी। इस दौरान लखीमपुर खीरी में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी। केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए गए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने। साल भर के विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की भी मांग किसान कर रहे हैं।
जिस एमएसपी के लिए किसान धरना दे रहे, वह क्या होती है?
एमएसपी यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस या फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य। केंद्र सरकार फसलों की एक न्यूनतम कीमत तय करती है, इसे ही एमएसपी कहा जाता है। अगर बाजार में फसल की कीमत कम भी हो जाती है, तो भी सरकार किसान को एमएसपी के हिसाब से ही फसल का भुगतान करेगी। इससे किसानों को अपनी फसल की तय कीमत के बारे में पता चल जाता है कि उसकी फसल के दाम कितने चल रहे हैं। ये एक तरह फसल की कीमत की गारंटी होती है। इससे पहले 31 जुलाई को पंजाब के किसानों ने अमृतसर, बठिंडा के वल्लाह में रेलवे ट्रैक पर बैठ गए थे और अपनी मांगों को पूरा नहीं करने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ अंबाला, पंचकूला के बरवाला और कैथल के चीका में शंभू टोल प्लाजा पर विरोध प्रदर्शन किया था।
19 नवंबर 2021 को तीनों कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान किया
तीनों नए कृषि कानूनों को 17 सितंबर, 2020 को लोकसभा ने मंजूर किया था। राष्ट्रपति ने तीनों कानूनों के प्रस्ताव पर 27 सिंतबर को दस्तखत किए थे। इसके बाद से ही किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था। हालांकि, 14 महीने बाद 19 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री ने कृषि कानून रद्द करने की घोषणा की।
इसके बाद दिसंबर 2021 में किसान संगठनों और सरकार के बीच अंतिम दौर की बातचीत में कई मुद्दों पर सहमति बनी थी। इनमें MSP तय करने पर कमेटी बनाने, मृत किसानों को मुआवजा देने और किसानों पर आंदोलन के दौरान लगे मुकदमे हटाने पर सहमति बनी थी।
