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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल एवं मनीष सिसोदिया को आज फिर चुनौती दी कि वे आबकारी नीति को लेकर तकनीकी सवालों का सही सही जवाब दें क्योंकि आबकारी के सवालों पर ‘कट्टर ईमानदारी’ और ‘बिरादरी’ के नाम की मक्कारी नहीं चलने वाली है।

भाजपा के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी और बाहरी दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा ने पार्टी मुख्यालय में आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर वह राजनीतिक नहीं बल्कि तकनीकी सवाल पूछ रहे हैं और आबकारी के इन तकनीकी सवाल के जवाब आबकारी पर होने चाहिए, न कि ‘कट्टर ईमानदारी’ और ‘बिरादरी’ पर। उन्होंने दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के कुछ प्रावधानों को उद्धृत किया जिसमें साफ साफ कहा गया है कि शराब उत्पादक, थोक वितरक और खुदरा वितरक, परोक्ष या प्रकारान्तर, किसी भी प्रकार से संबद्ध नहीं होना चाहिए अन्यथा एकाधिपत्य का खतरा बन जाएगा। लेकिन हकीकत दूसरी है। ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जिनमें उत्पादक एवं वितरक एक ही हैं। इंडो स्प्रिट नामक एक कंपनी को उत्पादन का लाइसेंस मिला, उसे ही ज़ोन 04, 23 एवं 22 में वितरण का भी लाइसेंस दिया गया।

श्री त्रिवेदी ने कहा कि ये भाजपा का आरोप नहीं है, बल्कि आबकारी विभाग ने दिल्ली सरकार से यह पूछा है। उन्होंने कहा कि गत 25 अक्टूबर 2021 को आबकारी विभाग ने पत्र लिख कर जवाब मांगा था लेकिन इसका कोई जवाब नहीं दिया गया। केजरीवाल सरकार ने आबकारी नीति को सीधे सीधे ध्वस्त कर दिया है। लोगों में मिथ्या भ्रम एवं झूठ फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के अनुसार उत्पादक वही है जो थोक वितरक है और वही खुदरा वितरक भी है तथा इस ‘कट्टर ईमानदारी’ के असत्य को निर्लज्जता से फैलाने वाले भी वही हैं।

श्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि आबकारी नीति को बनाने के लिए गठित समिति ने तय किया था कि किसी एक ब्रॉण्ड को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। एक पेटी के साथ एक पेटी मुफ्त का प्रचार करना गलत था। समिति का मानना था कि थोक वितरक एक सरकारी उपक्रम होना चाहिए जैसे कि कर्नाटक में है। पर ऐसा नहीं किया गया। केजरीवाल सरकार ने थोक वितरक का कमीशन दो प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत क्यों किया, इसका कोई उत्तर नहीं है। नीति में 800 दुकानें खोलने एवं एक एक आदमी को अलग अलग दुकानें देने की बात कही गयी थी लेकिन यहां एक ही आदमी को सौ सौ दुकानें आवंटित की गयी हैं। महादेव एवं बड़ी पंजाब जैसी दो कंपनियां हैं जिनको तीनों लाइसेंस मिल हुए हैं।

श्री वर्मा ने कहा कि थोक वितरक लाइसेंस धारकों को जमानत का 144 करोड़ रुपए वापस कर दिया गया है लेकिन छोटे व्यापारियों को कुछ नहीं दिया गया। नीति में लिखा है कि किसी को भी पैसा वापस नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली ऐसा पहला प्रदेश होगा जहां आबकारी मंत्री और शिक्षा मंत्री एक ही व्यक्ति है। शिक्षा मंत्री ने शराब के सेवन की आयुसीमा घटा दी ताकि विद्यार्थी भी शराब का सेवन कर सकें। जब मंत्री महोदय से सवाल विज्ञान का किया जाता है तो वह उत्तर इतिहास का देते हैं क्योंकि दिल्ली के 60 प्रतिशत स्कूलों में विज्ञान पढ़ाया ही नहीं जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 में दिल्ली में दस हजार करोड़ रुपए की शराब बिकी और 4200 करोड़ रुपए का आबकारी शुल्क मिला। वर्ष 2020-21 में 7860 करोड़ रुपए की शराब बिक्री हुई और आबकारी शुल्क 3300 कराेड़ रुपए का मिला। लेकिन वर्ष 2021-22 के सात माह में दस हजार करोड़ रुपए से अधिक की शराब विक्रय हुआ लेकिन आबकारी शुल्क केवल 158 करोड़ रुपए मिला। इस प्रकार से पता चलता है कि राजस्व में तीन हजार करोड़ रुपए और आबकारी शुल्क में 3500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।

श्री वर्मा ने कहा कि किसी सरकार को उसकी नीति से 6500 करोड़ रुपए का नुकसान होता है तो यह निश्चित रूप से गंभीर अपराध है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ये पैसा गया कहां। श्री त्रिवेदी ने कहा कि श्री केजरीवाल को समझ लेना चाहिए कि आबकारी पर सवाल के जवाब भी आबकारी पर होने चाहिए। कट्टर ईमान एवं बिरादरी की बात की मक्कारी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि हमारे सवाल तकनीकी हैं, राजनीतिक नहीं तो जवाब भी तकनीकी ही होने चाहिए।