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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में प्रस्ताव पेश होने के तीन दिन बाद गुरुवार को केजरीवाल सरकार ने विश्वासमत जीत लिया है। सरकार के सपोर्ट में 58 वोट पड़े हैं, जबकि भाजपा ने वोटिंग से वॉकआउट कर दिया। 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में आप के 62 और भाजपा के 8 विधायक हैं।

गुरुवार को सदन शुरू होते ही भाजपा विधायक शराब घोटाले की चर्चा को लेकर हंगामा करने लगे, जिसके बाद डिप्टी स्पीकर राखी बिरला ने भाजपा के 2 विधायकों को मार्शल आउट कर दिया। विधायकों के मार्शल आउट के बाद दिल्ली असेंबली में नेता प्रतिपक्ष रामवीर विधूड़ी ने कहा कि 2000 करोड़ रुपए का शराब घोटाला है और हमारे विधायकों को बोलने नहीं दिया जा रहा है।

सदन में मौजूद आम आदमी पार्टी (आप) के सभी विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। इसके खिलाफ कोई वोट नहीं पड़ा क्योंकि भाजपा के तीन विधायकों विजेंद्र गुप्ता, अभय वर्मा तथा मोहन सिंह बिष्ट को उपाध्यक्ष राखी बिड़ला के साथ नोंकझोंक के बाद विधानसभा से मार्शल के जरिए बाहर निकाल दिया गया।

बिड़ला ने विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले ध्यानाकर्षण प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर गौर करने की उनकी मांग नहीं मानी थी। भाजपा के बाकी विधायकों ने इसके विरोध में सदन से बहिर्गमन कर दिया।

आप को भाजपा के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे केजरीवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर अभी केवल दो पार्टी हैं - ‘कट्टर ईमानदार पार्टी और कट्टर बेईमान पार्टी’।

केजरीवाल ने गुजरात चुनाव से सीबीआई रेड को जोड़ा
विश्वासमत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई के अधिकारी मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर सकती है। केजरीवाल ने आगे दावा किया कि अगर सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया तो गुजरात चुनाव में हमारे वोट पर्सेंटेज बढ़ेंगे। उन्होंने आगे कहा कि मेरे खिलाफ भी इन्होंने 16 केस किए गए थे, 12 केस में मैं बरी हो गया।

आप का आरोप- ऑपरेशन लोटस से विधायक खरीदने की कोशिश
मनीष सिसोदिया के घर पर 19 अगस्त को सीबीआई रेड के बाद आप ने भाजपा पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगाया। आप ने कहा कि भाजपा 800 करोड़ रुपए खर्च कर हमारे 40 विधायकों को खरीदना चाहती है। भाजपा के लोगों ने 12 विधायकों को 20-20 करोड़ रुपए का ऑफर भी दी है।

19 अगस्त से दिल्ली में आप और भाजपा के बीच तकरार
आबकारी नीति को लेकर दिल्ली में पहली बार 19 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई ने छापेमारी की थी। यह छापेमारी करीब 14 घंटे तक चली थी, जिसके बाद सीबीआई ने इस मामले में पीएमएलए कानून के तहत केस दर्ज कर लिया था।