नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। समाचार एजेंसी के मुताबिक कैबिनेट की बैठक में सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए योजना में संशोधनों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें तीन निर्णय लिए गए। मंत्रीमंडल ने उच्च दक्षता वाले सौलर पीवी मॉड्यूल ट्रांस-2 के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी। इसके प्रोत्साहन के लिए 19,500 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है।
नेशनल लॉजस्टिक पॉलिसी को भी मंजूरी
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि नेशनल लॉजस्टिक पॉलिसी को भी मंजूरी दी गई है। साथ ही इंटिग्रेटेड लाजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई है। इसमें 30 डिजिटल सिस्टम इंटीग्रेटेड हैं। इससे लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का लाभ मिलेगा और व्यापार करने में आसानी होगी। यह नीति लॉजिस्टिक्स सेवाओं में अधिक दक्षता के लिए एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म और इसके मानकीकरण के लिए होगी। इससे निगरानी ढांचे और कौशल विकास को भी गति मिलेगी। इस फैसले से लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिंग में सुधार होगा।
सेमीकंडक्टर्स निर्माण के क्षेत्र में आएगी क्रांति
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह भी बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए कार्यक्रम में बदलावों को मंजूरी दी। उन्होनें कहा- देश में सेमीकंडक्टर के विकास और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम कार्यक्रम में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्रौद्योगिकी नोड्स के साथ सरकार सेमीकंडक्टर्स फैब समेत इसकी पैकेजिंग और अन्य सेमीकंडक्टर्स सुविधाओं के लिए सरकार कंपनियों को 50 फीसद प्रोत्साहन देगी।
फैसलों से यह होगा लाभ
अनुराग ठाकुर ने कहा कि कैबिनेट के फैसलों के बाद देश की क्षमता बढ़ेगी, निवेश आएगा, रोजगार-स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, आयात में कमी आएगी। केंद्र सरकार के ताजा फैसलों के बाद पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से सोलर पीवी निर्माताओं का चयन होगा। सरकार उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई देगी। इससे अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से इस क्षेत्र में एक लाख 95 हजार रोजगार के प्रत्यक्ष मौके उपलब्ध होंगे। इस फैसले का मकसद नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम करना है।