0 हिंदू पक्ष ने संरचना की उम्र तय करने के लिए वैज्ञानिक जांच की मांग थी
वाराणसी। वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में मिले 'कथित शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग नहीं होगी। चार हिंदू महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली शिवलिंग जैसी संरचना की उम्र, लंबाई और चौड़ाई का पता लगाने के लिए इसकी वैज्ञानिक जांच की मांग की थी। जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश देने की अपील की गई थी। वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने यह मांग खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में कुल 58 लोगों को एंट्री दी गई थी।
जिला न्यायाधीश अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने हिंदू पक्ष की इस अर्जी पर दोनाें पक्षों की सुनवाई पूरी करने के बाद इसे खारिज कर दिया। न्यायाधीश ने अपने फैसलने में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस प्रकरण पर सुनवाई के दौरान गत 17 मई को वजूखाना क्षेत्र को सुरक्षित बनाये रखने का आदेश दिया था। ऐसी स्थिति में यदि कार्बन डेटिंग और भूमिगत परीक्षण संबंधी ‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार’ तकनीकि के प्रयोग से कथित शिवलिंग को यदि कोई क्षति पहुंचती है तो यह उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन होगा। न्यायाधीश ने यह भी कहा, “एेसा होने पर आम जनता की धार्मिक भावनाओं को भी चोट पहुंच सकती है।
फैसले में अदालत ने कहा कि इस स्तर पर कथित शिवलिंग की आयु, प्रकृति आैर संरचना का निर्धारण करने के लिये भारतीय पुरातत्व सर्वे को निर्देश दिया जाना उचित नहीं होगा। ऐसे आदेश से इस वाद में अंतर्निहत प्रश्नों के न्यायपूर्ण समाधान की कोई संभावना प्रतीत नहीं होती है। इसलिये वादी पक्ष का प्रार्थना पत्र निरस्त होने योग्य है।
कोर्ट के ऑर्डर के बाद हिंदू पक्ष के एडवोकेट शिवम गौड़ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कथित शिवलिंग मिलने की जगह को सुरक्षित और संरक्षित किया जाए। इसका हवाला देते हुए जिला कोर्ट ने कार्बन डेटिंग या अन्य वैज्ञानिक पद्धति से जांच की मांग खारिज कर दी है।
उल्लेखनीय है कि इस साल मई में वाराणसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराने का आदेश दिया था। सर्वे के दौरान मस्जिद के वजूखाने में पत्थर का एक शिवलिंग जैसा ढांचा मिला था। हिंदू पक्ष इसे शिवलिंग तथा मुस्लिम पक्ष इसे वजूखाने का फव्वारा बता रहा था। मुस्लिम पक्ष स्थानीय अदालजत के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय गया था। उच्चनत न्यायालय की पीठ ने वजूखाना क्षेत्र को संरक्षित करने का आदेश देते हुए मुसलमानों के नमाज और अन्य मजहबी क्रियाकलापों को निर्बाध रूप से जारी रखने आदेश दिया था।
वाराणसी में ज्ञानवापी से जुड़ा ताजा विवाद
ताजा विवाद वाराणसी में काशी विश्वनाथ परिसर में मौजूद ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देवी-देवताओं की रोजाना पूजा-अर्चना को लेकर है। 18 अगस्त 2021 को 5 महिलाएं ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मां श्रृंगार गौरी, गणेश जी, हनुमान जी समेत परिसर में मौजूद अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की इजाजत मांगते हुए हुए कोर्ट पहुंची थीं। अभी यहां साल में एक बार ही पूजा होती है।
मसाजिद कमेटी ने कहा था- जांच की जरूरत नहीं
इस मामले में ज्ञानवापी मसाजिद कमेटी ने कहा था- कथित शिवलिंग की वैज्ञानिक जांच की कोई जरूरत नहीं है। हिंदू पक्ष ने अपने केस में ज्ञानवापी में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष देवी-देवताओं की पूजा की मांग की है। फिर यह शिवलिंग की जांच की मांग क्यों कर रहे हैं...? हिंदू पक्ष ज्ञानवापी में कमीशन की ओर से सबूत इकट्ठा करने की मांग कर रहा है। सिविल प्रक्रिया संहिता में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
कमेटी ने दलील दी थी कि 16 मई 2022 को एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान मिली आकृति पर असमंजस है। उससे संबंधित आपत्ति का निपटारा भी नहीं हुआ है। 17 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने भी आकृति मिलने वाली जगह को सुरक्षित रखने के लिए कहा है। ऐसे में वहां खुदाई या अलग से कुछ भी करना उचित नहीं होगा।
हिंदू पक्ष की दलील- जांच से विवाद खत्म होगा
इस मामले में याचिका लगाने वाली महिलाओं का कहना था कि हमारे मुकदमे में दृश्य या अदृश्य देवता की बात कही गई है। सर्वे के दौरान मस्जिद के वजूखाने से पानी निकाले जाने पर अदृश्य आकृति दृश्य रूप में दिखाई दी। ऐसे में अब वह मुकदमे का हिस्सा है। ऐसे में उस आकृति को नुकसान पहुंचाए बगैर उसकी और उसके आसपास के एरिया की वैज्ञानिक पद्धति से जांच जरूरी है।
हिंदू पक्ष ने कहा था कि कार्बन डेटिंग से आकृति की आयु, उसकी लंबाई-चौड़ाई और गहराई का तथ्यात्मक रूप से पता लग सकेगा। बीते 11 अक्टूबर को दोनों पक्ष की बहस खत्म हुई तो कोर्ट ने अपना ऑर्डर सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की अगली डेट 14 अक्टूबर तय की थी।