0 मोदी कैबिनेट ने लिया फैसला
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रबी की विभिन्न फसलों के आगामी विपणन सत्र 2023-24 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) संशोधित करने का फैसला किया जिसके तहत गेंहू का एमएसपी 110 रुपये और जौ का 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। मंत्रिमंडल बैठक में 6 रबी फसलों की एमएसपी निर्धारित की है, जिसमें गेहूं के लिए 110 रुपये, जौ में 100 रुपये, चना में 105 रुपये, मसूर में 500 रुपये, सरसों में 400 रुपये और कुसुम में 209 रुपये की वृद्धि की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार सुबह हुई मंत्रिमंडल के निर्णय की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने संवाददाताओं को बताया कि चना के एमएसपी में 105 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर में 500 रुपये, सरसों में 400 रुपये और कुसुम के एमएसपी में प्रति क्विंटल में 209 रुपये की वृद्धि का निर्णय किया गया है।
इस निर्णय के अनुसार गेंहू का एमएसपी बढ़कर 2,125 प्रति क्विंटल, जौ 1,735 रुपये, चना 5,335, मसूर 6,000 रुपये, सरसों 5450 और कुसुम का एमएसपी 5,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
केंद्रीय मंत्री ठाकुर ने बताया कि मंत्रिमंडल बैठक में 2023-24 के 6 रबी फसलों की एमएसपी निर्धारित की है, जिसमें गेहूं के लिए 110 रुपये, जौ में 100 रुपये, चना में 105 रुपये, मसूर में 500 रुपये, सरसों में 400 रुपये और कुसुम्भ में 209 रुपये की वृद्धि की गई है। मंत्रिमंडल की बैठक के फैसले के अनुसार मसूर का एमएसपी सबसे अधिक बढ़ाया गया है। श्री ठाकुर ने कहा कि श्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसानों की बेहतरी के लिए फैसले करती है। इससे विपणन सीजन 2023-24 में गेहूं की खरीद 2,125 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के हिसाब से होगी।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन सीजन 2023-24 के लिए सभी रबी फसलों के लिए एमएसपी को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि मसूर के एमएसपी में अधिकतम 500 रुपये प्रति क्विंटल की मंजूरी दी गई है। बता दें कि रबी फसलों की एमएसपी में की गई ये वृद्धि 2022-23 की रबी फसलों पर लागू होगी, जिनकी बिक्री रबी विपणन सत्र 2023-24 में होगी।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ये कहा
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 2022-23 की 6 रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। सभी एमएसपी कृषि लागत और मूल्य आयोग (CCEA) की ओर से की गई सिफारिश के अनुरूप हैं। मंत्रालय ने जानकारी दी कि आयोग की ओर से एमएसपी के निर्धारण में उत्पादन लागत को सबसे अहम कारक के रूप में लिया जाता है। इसके अलावा भी कई कारकों पर विचार किया जाता है, जैसे कि फसल की डिमांग और सप्लाई की स्थिति, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों का ट्रेंड आदि।
फसलों की औसत उत्पादन लागत से डेढ़ गुना ज्यादा एमएसपी
मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि 2018 के यूनियन बजट में इस सिद्धांत की घोषणा की गई थी कि किसानों को लागत मू्ल्य का कम से कम डेढ़ गुना एमएसपी के रूप में दिया जाए। निर्धारित एमएसपी विभिन्न फसलों की औसत उत्पादन लागत (CoP) के डेढ़ गुना से काफी ज्यादा है। गेहूं का एमएसपी 100 फीसदी यानी सीओपी का दोगुना है। सरसों का 104 फीसदी यानी दोगुना से ज्यादा, चने का 66 फीसदी, मसूर का 85 फीसदी, जौ का 60 फीसदी और कुसुम्भ का 50 फीसदी एमएसपी है।
मंत्रालय ने कहा पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा है एमएसपी
इसमें आगे बताया गया कि सभी फसलों के लिए निर्धारित एमएसपी पिछले वर्ष की तुलना में भी ज्यादा है। पिछले वर्ष की तुलना मे तिलहनों और सरसों के एमएसपी में 400 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि है जो पिछले वर्ष से 7.9 फीसदी अधिक है। मसूर के एमएसपी में 500 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा है जो पिछले वर्ष से 9 फीसदी अधिक है। गेहूं में 110 रुपये प्रति क्विंटल है जो पिछले वर्ष से 6.1 फीसदी ज्यादा है। चने के एमएसपी में 105 रुपये प्रती क्विंटल की वृद्धि है जो पिछले वर्ष से 2 फीसदी ज्यादा है।
इन माध्यमों से की जाएगी फसलों की खरीद
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बताया कि पहले की तरह एमएसपी पर गेहूं की खरीद एफसीआई के जरिये राज्यों की एजेंसियां करेंगी। इसी तरह दलहन और तिलहन की खरीद भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और छोटे किसानों का कृषि व्यवसाय संघ (SFAC) करेगा।