Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 48 घंटे में कुल 81 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
0 सरेंडर नक्सलियों पर कुल 1.41 करोड़ का इनाम घोषित था
0 इनमें डीवीसीएम-एसीएम रैंक के नक्सली शामिल

बीजापुर। बीजापुर में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम’ के अंतर्गत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा और हथियारों का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विकास की मुख्यधारा को अपनाया है।इनमें 21 महिला और 31 पुरुष शामिल हैं। इन पर कुल 1.41 करोड़ का इनाम घोषित था, जिससे यह आत्मसमर्पण अभियान अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धियों में शामिल हो गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे हिंसा की विचारधारा पर विश्वास की निर्णायक विजय बताया और कहा कि पिछले 48 घंटों में कुल 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवाद अब केवल कमजोर नहीं पड़ रहा, बल्कि पूरी तरह बिखर रहा है।
जानकारी के मुताबिक, सरेंडर करने वालों में एक डीवीसीएम, पांच कंपनी कमांडर/पीपीसीएम, 10 एसीएम, 8 डिवीजन और ब्यूरो पार्टी सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा प्लाटून, एरिया कमेटी, मिलिशिया और जनसंगठन से जुड़े कई सदस्य भी हैं।

50 हजार रुपए की सहायता दी गई
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन की ओर से हर कैडर को 50,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से अब तक 876 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं।

इन नक्सलियों ने किया सरेंडर
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में लक्खू कारम उर्फ अनिल (8 लाख), लक्ष्मी माड़वी उर्फ रत्ना (8 लाख), चिन्नी सोढ़ी उर्फ शांति (8 लाख), भीमा कारम (5 लाख), विष्णु मण्डावी उर्फ किरण उर्फ मोती (5 लाख), मोती कोरसा (5 लाख), हुंगी कारम उर्फ अंजली (5 लाख), आयतू हपका (5 लाख), कमला भोगाम (5 लाख), ललिता मुचाकी (5 लाख), गौरी कुड़ियम उर्फ गीता उर्फ अन्नू (5 लाख), बोदी हेमला उर्फ अनुशा (5 लाख), बाबू अंगनपल्ली उर्फ अनिल (5 लाख), सुखराम कुड़ियम (5 लाख), पण्डरू पोटाम (5 लाख), लक्की ओयाम (5 लाख), मुन्ना पोड़ियम (2 लाख),  रत्तू ओयाम उर्फ रतन (2 लाख), मंगली मिडियम (2 लाख), मोटू मिडियम (2 लाख), आयतू कारम (2 लाख), कोपे माड़वी उर्फ सामो (2 लाख), हुंगी माड़वी ( 2 लाख), मिटकी पुनेम उर्फ समीरा (2 लाख), अंदो मिच्चा (2 लाख), सुकमन वेको (2 लाख), मोटी फरसीक (2 लाख), कोसा माड़वी उर्फ डुई (2 लाख), चैतू कुंजाम उर्फ देवा (2 लाख), मुडा माड़वी (2 लाख), सम्मैया तलाण्डी (2 लाख), हुंगा कर्मा (2 लाख), रमेश उद्दे (2 लाख), बिक्का गोटा (2 लाख), भीमा माड़वी (2 लाख), कोपे कड़ती (1 लाख), पण्डरू फरसा उर्फ बण्डे (1 लाख), मूडो पोयाम उर्फ अनिता (1 लाख), पायके कोवासी (1 लाख), सोनी कारम (1 लाख), आयती कारम उर्फ पुनीता (1 लाख), कमली माड़वी (1 लाख), सम्मा तलाण्डी (1 लाख), हड़मा कुहराम उर्फ वक्के (1 लाख), राजेन्द्र कवासी उर्फ जोगा (1 लाख), विनोद कुरसम (1 लाख), आयतू उईका (1 लाख), बदरू कुरसम (1 लाख), कन्हैया गोटा उर्फ कन्ना (1 लाख),  मल्लेश कारम उर्फ भीमा व सुदेश उईका उर्फ मुन्ना शामिल हैं। 

बंदूक के नहीं, विकास के साथ है भविष्यः मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब माओवादी संगठन के साथ-साथ उसकी विकृत विचारधारा और उसका पूरा सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो चुका है। जहाँ कभी भय, भ्रम और दबाव का माहौल था, वहाँ अब शासन की सशक्त उपस्थिति, सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुँच ने लोगों में भरोसा पैदा किया है। ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत सरकार उन सभी भटके युवाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रही है, जो हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, और यह व्यापक आत्मसमर्पण उसी भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को इस सफलता का आधार बताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब तेज़ी से निर्णायक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब भय की जगह भविष्य आकार ले रहा है, जहाँ सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ, आजीविका और शासन की पहुँच लगातार मजबूत हो रही है।