0 कहा-संकल्प लेने के साहस से 2 वर्ष में खत्म हुई 5 दशक की समस्या
0 प्रेस क्लब में हमर पहुना कार्यक्रम में गृह मंत्री विजय शर्मा का बड़ा ऐलान
रायपुर। गृह मंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस से मिलिए 'हमर पहुनाÓ कार्यक्रम में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अब सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो गया है। संकल्प लेने के साहस के साथ 2 साल में हीं 5 दशक पुरानी समस्या खत्म हुई है। आज बहुत ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि पूरे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का कैडर समाप्त हुआ। सरकार बदली और संकल्प बदल गया। बस्तर के लोगों ने ठाना नक्सलवाद खत्म हो। नक्सलवाद के खत्म होने का पूरा श्रेय बस्तर के लोगों जाता है। आम्र्ड फोर्स के जवानों को जाता है और सरकार के प्रयास को जाता है।
श्री शर्मा ने नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर सरकार की रणनीति, अब तक की प्रगति की जानकारी साझा की। श्री शर्मा ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। पूरे छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के समस्त कैडर समाप्त हो चुका है। श्री शर्मा ने बताया कि माओवाद के खिलाफ इस बड़े अभियान की नींव जनवरी 2024 में हुई एक अहम बैठक में रखी गई थी। इस बैठक में सीआरपीएफ, बीएसएफ समेत सभी केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट रोडमैप दिया गया, ताकि समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। श्री शर्मा ने कहा कि 24 अगस्त 2024 तक सभी एजेंसियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसके बाद 31 मार्च 2026 तक माओवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया। इस रणनीति में 'मल्टी-डायमेंशनल अप्रोचÓ अपनाई गई है, जिसमें केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक और विकासात्मक पहलों को भी समान रूप से महत्व दिया गया।
बस्तर की जनता और सुरक्षाबलों को दिया श्रेय
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय बस्तर की जनता को जाता है, जिन्होंने माओवाद को स्वीकार करना छोड़ दिया और शांति का रास्ता चुना। उन्होंने सुरक्षाबलों के साहस और बलिदान की भी सराहना करते हुए कहा कि इंटेलिजेंस सिस्टम के अपग्रेड होने से सटीक और प्रभावी ऑपरेशन संभव हो सके हैं।
संवाद और पुनर्वास से बदली तस्वीर
विजय शर्मा ने बताया कि नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में समाज के प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में लोगों ने मुख्यधारा में लौटते हुए पुनर्वास का रास्ता चुना। एक अक्टूबर 2025 को 210 लोगों ने पुनर्वास स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक तरफ जहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए 120 से ज़्यादा सुरक्षा कैंप बनाए गए। वहीं दूसरी ओर आदिवासी इलाकों में आम लोगों के जीवन को बेहतर करने के लिए नवीन पुल-पुलिया निर्माण के साथ संचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए मोबाइल टावर बनाए गए हैं।
99 प्रतिशत माओवाद खत्म
उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों और स्थानीय भाषाओं में सूचना प्रसारण से सामाजिक बदलाव आया है। वर्तमान स्थिति में छत्तीसगढ़ में लगभग 99 प्रतिशत माओवाद खत्म हो चुका है और बचे हुए सक्रिय कैडर बेहद सीमित हैं, जो किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की स्थिति में नहीं हैं। आज जब हम बात कर रहे हैं, तो मेरा मानना है कि जो 15-20 नक्सली शेष हैं, वे भी पुनर्वास की प्रक्रिया में हैं। ग्रामीणों के बीच कहीं छुपकर रह रहे हैं। 31 मार्च 2026 की निर्धारित समयसीमा तक राज्य में नक्सली संगठन का सशस्त्र कैडर पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
बस्तर में अब पहुंचेगा संविधान का शासन
नक्सलमुक्त अभियान को पिछले दो वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए श्री शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि इनके प्रयासों से संविधान का शासन बस्तर और राज्य के हर कोने तक पहुंचा है।
सटीक तरीके से चले नक्सल विरोधी ऑपरेशन
उन्होंने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान इतने सटीक थे कि सुरक्षा कर्मियों को खरोंच तक नहीं आई, जबकि कई नक्सली मारे गए। पिछले दो वर्षों में हमारी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सलवाद पर नियंत्रण पाना रही है। बस्तर में सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि सुरक्षा शिविर फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि जनता का भरोसा बनने में समय लगता है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अंदरूनी इलाकों में मौजूद करीब 400 सुरक्षा शिविरों को धीरे-धीरे पुलिस थानों, स्कूलों, अस्पतालों या पंचायत भवनों जैसे आधारभूत ढांचों में बदला जाएगा। बस्तर में तैनात अधिकांश अर्धसैनिक बलों को 31 मार्च 2027 तक वापस बुलाया जा सकता है।
विपक्ष पर हमला, कहा-सहयोग के बजाय आरोप
विजय शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एनकाउंटर को लेकर बेवजह आरोप लगाए गए। यहां तक कि नक्सलियों के प्रेस नोट का सहारा लिया गया, लेकिन आज बस्तर की जनता ने खुद विपक्ष को जवाब दे दिया है। अब बस्तर में शांति का माहौल है और बस्तर पंडुम व बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन हो रहे हैं। स्थानीय लोग अब खुलकर विकास की मांग कर रहे हैं, जो पहले डर के कारण संभव नहीं था।
आत्मसमर्पण को दिया 'सम्मानजनक' रूप
गृह मंत्री श्री शर्मा ने बताया कि सरकार ने 'सरेंडर' की जगह 'ससम्मान आत्मसमर्पण' की नीति अपनाई, जिसके तहत 2000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। पुनर्वास नीति को भी उन्होंने बेहद कारगर बताया। श्री शर्मा ने कहा कि नक्सल उन्मूलन में स्थानीय पत्रकारों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और क्षेत्रीय भाषा-रेडियो की बड़ी भूमिका रही, जिससे जागरूकता फैली।
नक्सल हिंसा की दर्दनाक तस्वीर भी आई सामने
कार्यक्रम की शुरुआत में नक्सल पीडि़तों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसमें आईईडी ब्लास्ट, हत्याएं और स्थानीय लोगों की पीड़ा को दर्शाया गया। कई लोग दिव्यांग हुए, तो कई ने अपनी जान गंवाई।