0 रिपोर्ट-आईटी सेक्टर में सीनियर कर्मचारियों की डिमांड बढ़ी
0 जूनियर्स और फ्रेशर्स की मुश्किलें बढ़ीं
नई दिल्ली। एआई भारत में नौकरियों पर खतरा है। जापानी फाइनेंशियल सर्विस कंपनी नोमुरा की रिपोर्ट इस बात को झुठला रही है। नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एआई नौकरियां खत्म करने की तुलना में नए रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा कर रहा है।
हालांकि, तकनीकी बदलाव की वजह से आईटी सेक्टर में जूनियर्स और फ्रेशर्स को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, चीन और फिलीपींस उन देशों में शामिल हैं, जहां एआई से नौकरियों का ग्राफ ऊपर गया है।
सीनियर एम्प्लॉइज की डिमांड बढ़ी
नोमुरा ने बाजार में आ रहे बदलाव को के-शेप्ड स्प्लिट का नाम दिया है। यानी रोजगार के लिए बाजार दो हिस्सों में बंट गया है। एक तरफ फ्रेशर्स की मांग लगातार गिर रही है, तो दूसरी तरफ अनुभवी सीनियर लोगों की पूछ बढ़ गई है। कंपनियों को अब मैनेजमेंट और बिजनेस की गहरी समझ रखने वाले लोग चाहिए। दक्षिण कोरिया में जिन सेक्टर में सबसे ज्यादा एआई का इस्तेमाल हुआ वहां ऐसा ही ट्रेंड दिखने को मिला है।
कर्मचारियों को बल्क में निकालने की जगह नई भर्तियां कम हुईं
कंपनियां पुराने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बजाय नए लोगों को नौकरी पर रखना ही बंद कर रही हैं। इसे साइलेंट फायरिंग कहा जा रहा है। इसके अलावा, कंपनियों ने कॉलेज कैंपस में जाकर होने वाले प्लेसमेंट को लगभग कम कर दिया है।
टेक सेक्टर में 90% नई नौकरियां
एआई की वजह से जो भी नए रोजगार पैदा हो रहे हैं, उनमें से 90% से ज्यादा नौकरियां अकेले टेक्नोलॉजी सेक्टर में आ रही हैं। बाकी सभी सेक्टर्स में हिस्सेदारी 10% से भी कम है।
इन क्षेत्रों में रास्ता खुला: भारत में सबसे ज्यादा डेटा एनोटेशन (डेटा को एआई के लिए तैयार करना), भाषा विज्ञान और एआई से जुड़ी आईटी सर्विसेज में नई भर्तियां हो रही हैं।
चीन हमसे आगे: भारत में जहां सपोर्ट और सर्विस वाली नौकरियां आ रही हैं, वहीं चीन में नया एआई मॉडल बनाने और डेवलप करने के लिए हाई-स्किल्ड ग्रेजुएट्स काम पर रख रहे हैं।
टेक से बाहर बहुत कम मौके: टेक्नोलॉजी से अलग अन्य सेक्टर्स में गिने-चुने पद ही आ रहे हैं, जैसे बैंकों में 'एआई रिस्क एनालिस्ट' या बिना ड्राइवर वाली गाड़ियों के एक्सपर्ट्स।
भारत के लिए आगे की राह और बड़ी परीक्षा
भारत के लिए बड़ी परीक्षा: भारत पूरी दुनिया का 'बैक-ऑफिस' (एआई और सर्विस हब) है। जिन आसान और रूटीन कामों के दम पर भारत का आईटी सेक्टर खड़ा है, उन्हें अब एआई बहुत आसानी से कर रहा है। इससे हमारे यहां की पारंपरिक नौकरियों पर बड़ा खतरा है।
टैलेंट है हमारी ताकत: खतरा जरूर है, लेकिन भारत के पास लाखों इंजीनियर्स और टेक टैलेंट का बड़ा पूल भी है। अगर हम खुद को अपग्रेड कर लें, तो एआई के दौर में आने वाले नए और बड़े अवसरों का सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।
एआई तेजी से एडवांस हो रहा: एआई अब सिर्फ छोटे-मोटे सीधे काम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खुद फैसले लेने वाले एजेंटिक सिस्टम के रूप में तेजी से बदल रहा है। आने वाले कुछ साल रोजगार बाजार को पूरी तरह बदल देंगे।