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वाजपेयी-राजीव गांधी से सीखें लोकतंत्र को जीवंत रखने की खूबी
कहते हैं कि राजनीति में समर्थन व विरोध का चोली दामन का साथ होता है और यही वो दो पहिये हैं, जो किसी भी देश के लोकतंत्र की पहचान बनते हैं.
कोरोना महासंकट निष्पत्ति है पर्यावरण उपेक्षा की
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। दुनियाभर में पर्यावरण को समर्पित यह खास दिन इंसानों को प्राकृतिक वातावरण के प्रति सचेत करने के लिए मनाया जाता है,
बदल जाएंगे ये नियम, डिजिटल सेवाओं के लिए देना होगा सुविधा शुल्क
हमारे रोजमर्रा के जीवन में गूगल की बढ़ती घुसपैठ के बीच उसके द्वारा दी जाने वाली बहुत सी सेवाएं अब मुफ्त नहीं रह जाएंगी और उनके लिए हमें निर्धारित मूल्य भी चुकाना होगा।
अनाथ बच्चों को पालने की सोच को सच बनाएं
भारत को सशक्त ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, स्नेहिल एवं आत्मीय बनाने की भी जरूरत है, इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने अनूठी एवं प्रेरक पहल की है।
विश्व की चूलें हिला देने वाली महामारी कोविड की सच्चाई की तह तक जानने के लिए जरूरी है चीन को जवाबदेह बनाना
विश्व की चूलें हिला देने वाली महामारी कोविड का जब प्रकोप शुरू हुआ था, तब कोरोना वायरस की पहचान चीन के वुहान शहर में की गई थी।
मातृभाषा में शिक्षा की दिशा में सार्थक पहल
सशक्त भारत-निर्माण एवं प्रभावी शिक्षा के लिए मातृभाषा में शिक्षा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका है।
सकारात्मक सोच की वैज्ञानिकता और कोरोना मुक्ति
सोचना एक कला है, हर आदमी इस कला को नहीं जानता, इस कला को जो जान लेता है, उसका मार्ग बहुत साफ, निष्कंटक, निरोगी एवं उसका जीवन सफल बन जाता है।
पारंपरिक बनाम एलोपैथ चिकित्सा पद्धति पर विवाद, सभी उपचार विधियों की अपनी महत्ता
यह सही है कि कोरोना महामारी के इलाज में सबसे कारगर हथियार हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता ही सामने आई है, और इसे बढ़ाने में एलोपैथ के साथ साथ पारंपरिक उपचार पद्धतियों का उल्लेखनीय योगदान सामने आया है।
वायरस पर नियंत्रण करता अमेरिका
कोरोना महामारी के संदर्भ में अमेरिका की मौजूदा स्थिति के बारे में अगर बहुत संक्षेप में कहना हो, तो यही कहा जा सकता है- बिना मास्क वाला अमेरिका. यह कहा जा सकता है कि बाकी दुनिया की तरह पिछले साल से कोविड-19 के संक्रमण से जूझते अमेरिका ने चौदह महीनों की अवध
प्रखर राष्ट्रवादी एवं स्वतंत्रता सेनानी थे सावरकर
नया भारत बनाने, भारत को नये सन्दर्भों के साथ संगठित करने, राष्ट्रीय एकता को बल देने की चर्चाओं के बीच भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रखर सेनानी, महान देशभक्त, ओजस्वी वक्ता, दूरदर्शी राजनेता, इतिहासकार, एक बहुत निराले साहित्यकार-कवि और प्रखर राष्ट्रवादी ने