जयपुर। खाटूश्यामजी में बाबा श्याम के दर्शन के लिए लाइन में लगे भक्तों के बीच सोमवार सुबह भगदड़ मचने से 3 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हो गए। भक्त सुबह से ही 5 घंटे इंतजार के बाद जैसे ही पट खुले, भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 3 महिलाओं की मौत हो गई और 4 लोग गंभीर घायल हैं।
3 महिलाओं की मौत के बाद जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाने की रस्मों में जुट गए हैं। एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने खाटू थानाधिकारी एसआई रिया चौधरी को सस्पेंड कर दिया है। वहीं सरकार ने मामले की जांच संभागीय आयुक्त विक्रम सीताराम भाले से कराने के आदेश दिए हैं।
मिस मैनेजमेंट से मची भगदड़
खाटूश्यामजी में 3 महिलाओं की मौत हादसा नहीं, हत्या थी। पुलिस-प्रशासन और मंदिर कमेटी की लापरवाही और मिस मैनेजमेंट के कारण भगदड़ मची। बताया जाता है कि खाटू मंदिर में पिछले कुछ समय से भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। वीकेंड के अलावा हर महीने की ग्यारस पर लाखों लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। पिछले महीने की भीड़ को देखते हुए इंटेलिजेंस ने इनपुट भी दिया था कि भीड़ बढ़ने से हादसा हो सकता था, इसके बाद भी पुलिस और मंदिर प्रबंधन ने इसे सीरियसली नहीं लिया और उस मुताबिक व्यवस्थाएं नहीं बनाईं।
1 लाख की भीड़ पर महज 150 पुलिसकर्मी
खाटू में लक्खी मेले के दौरान 3 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन मासिक मेले के दौरान सिर्फ 300 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। वो भी दो शिफ्ट में। सुबह 5 बजे, जब 1 लाख श्रद्धालु दर्शन का इंतजार कर रहे थे तो उन्हें कंट्रोल करने के लिए सिर्फ 150 पुलिसकर्मी थे।
लोगों ने तोड़ दिया गेट का ताला
रात को 12 बजे बंद कर दिए गए थे। सुबह 5 बजे दर्शनों के लिए मंदिर के पट खोले गए। जैसे ही दर्शनों के लाइन शुरू हुई, लोग मंदिर की ओर भागने लगे। श्याम बगीची के पास जिगजैग में काफी भीड़ थी। पड़ोस में मिठाई की दुकान वाले ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, ऐसे में कुछ लोगों ने पास के गेट पर लगे ताले को पत्थर से तोड़ दिया। फिर इसी गेट से श्रद्धालु आगे मंदिर की ओर भागने लगे।
जिगजैग का रास्ता बदला
इस बार लक्खी मेले की तरह तोरण द्वार से ही जिगजैग की व्यवस्था कर दी गई थी। श्रद्धालु शनि मंदिर, श्री श्याम कुंड, मोदी चौक से लाला मांगेराम धर्मशाला से होकर मुख्य मेला मैदान के जिगजैग तक पहुंच रहे थे। श्रद्धालुओं को दो घंटे जिगजैग में ही लग रहे थे। जबकि इससे पहले ग्यारस के मेले में भक्त शहर में से होते हुए मुख्य मंदिर तक पहुंचते हैं। यहां से जिगजैग में लगते हैं और दर्शन करते हैं। इस बार भीड़ कंट्रोल करने के लिए की गई व्यवस्था से ही मैनेजमेंट बिगड़ गया।