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0 कॉलेजियम में शामिल दो जजों ने प्रोसेस पर उठाए सवाल
0 30 सितंबर की बैठक को खारिज किया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के दो मेंबर्स ने सर्कुलेशन से जजों की चयन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। कॉलेजियम के सदस्यों ने इसे लेकर बयान जारी किया है। सदस्यों का कहना है कि सर्कुलेशन मेथड से जजों की न्युक्ति ठीक नहीं है। इस कारण 30 सिंतबर को हुई बैठक को खारिज करने का फैसला लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में होते हैं 5 सदस्य
कॉलेजियम में 5 सदस्य होते हैं। सीजेआई इसमें प्रमुख होते हैं। इसके अलावा 4 मोस्ट सीनियर जज होते हैं। इसके सदस्यों में सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस एस.के. कौल, जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस के.एम जोसेफ शामिल हैं। कॉलेजियम ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति और उनके नाम की सिफारिश केंद्र से करता है।

क्या है मामला
बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में 4 जजों के खाली पदों को भरने के लिए कुछ समय से चर्चा चल रही थी। 26 सितंबर, 2022 को पहली बार 11 जजों के नामों को लेकर बैठक हुई। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस दीपांकर दत्ता के नाम की सिफारिश की गई थी और 10 अन्य जजों के नामों पर भी कॉलेजियम की ओर से विचार किया गया था, लेकिन कुछ सदस्यों ने उम्मीदवारों के ज्यादा फैसलों की मांग की। इसके लिए बैठक को 30 सितंबर के लिए टाल दिया गया।

बैठक में शामिल नहीं हुए जस्टिस चंद्रचूड़
30 सितंबर की बैठक में जस्टिस चंद्रचूड़ शामिल नहीं हुए, क्योंकि 30 सितंबर को रात 9.15 बजे तक वह सुनवाई कर रहे थे। इसके बाद सीजेआई ने 30 सितंबर को चारों सदस्यों को पत्र लिखकर खुद से चुने हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रविशंकर झा, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी वी संजय कुमार और सीनियर एडवोकेट के वी विश्वनाथन की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा और चारों से इस संबंध में उनकी राय मांगी।

जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नजीर ने आपत्ति जताई
जस्टिस कौल और जस्टिस जोसेफ ने 1 अक्तूबर और 7 अक्तूबर को अपनी-अपनी राय दे दी, लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नजीर ने 1 अक्टूबर को सीजेआई के पत्र में अपनाए गए तरीके पर आपत्ति जताई। हालांकि, उन्होंने इसमें किसी भी उम्मीदवार के खिलाफ किसी भी विचार का खुलासा नहीं किया। इसके बाद सीजेआई ने 2 अक्टूबर को इन जजों को पत्र लिखकर उनसे दूसरे सुझाव मांगे, लेकिन इसका कोई जवाब नहीं दिया गया।