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विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ का अंजाम अब भुगत रहे हैं
आज पूरे देश के शहरी इलाकों में ऑक्सीजन को लेकर त्राहिमाम है। अदालतें ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर सरकार पर सख्ती बरत रही हैं, सरकारें ऑक्सीजन के उत्पादन और वितरण में रात दिन लगी हुई हैं।
राष्ट्रवाद के सहारे पेट नहीं भरता, मोदी सरकार को आम आदमी को राहत देनी होगी
२०19 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 40.3 फीसदी वोट मिले थे लेकिन तूफानी प्रचार और सारी ताकत पश्चिम बंगाल में झोंक देने के बाद भी इस बार उसका मत प्रतिशत थोड़ा नीचे गिरकर 38.13 फीसदी रहा और वह उतनी सीटों पर भी नहीं जीत सकी।
अदृश्य शत्रु से संघर्ष : कोविड-19की चुनौती पर रक्षा मंत्रालय का जवाब
पिछले 2-3 सप्ता ह के दौरान कोविड -19 के मरीजों की संख्याद अत्य धिक बढऩे से सदी का सबसे बड़ा संकट उत्पेन्न- हो गया है।
जीवन बचाने में असफल सरकार चिता की लकड़ी ही मुहैय्या करा दें
देश इस समय जिन प्रलयकारी परिस्थितियों का सामना कर रहा है उसकी तो शायद वर्तमान पीढ़ी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
कोरोना जैसे ही खतरनाक हैं महामारी के इस दौर में कालाबाजारी करने वाले
देश में कोरोना महामारी महासंकट बन असंख्य लोगों की जान ले रहा है, तब दवाइयों और इंजेक्शनों के तमाम जमाखोर सक्रिय हो गये हैं। इस जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर रोक लगाने की कोशिशें सफल होती नजर नहीं आ रही हैं।
हर क्षेत्रीय दल की जीत को मोदी के लिए चुनौती बताना गलत
हमें कोई भी विश्लेषण करने से पहले देश की जनता के बदले मिजाज को समझना चाहिए। देश में जब वर्ष 2014 में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनी थी तो ऐसा 30 वर्ष से ज्यादा समय के बाद हुआ था। देश ने गठबंधन सरकारों की मजबूरियों को बहुत सहा है।
मानवीयता की छीजत का परिणाम है कोरोना
ंहिंदुस्तान में आज लाखों लोगों को कोरोना नहीं मार रहा, इंसान इंसान को मार रहा है, इंसान का लोभ एवं लालच इंसान को मार रहा है। ऐसे स्वार्थी लोगों को राक्षस, असुर या दैत्य कहा गया है जो समाज एवं राष्ट्र में तरह-तरह से कोरोना महामारी को फैलाने में जुटे हैं।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच टेलीमेडिसिन का प्रयोग एक बेहतर विकल्प
देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से कई राज्यों में एक बार फिर से भयावह स्थिति पैदा हो गई है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव पडऩा तय है।
भारत में क्यों हमेशा सही साबित नहीं होते एग्जिट पोल के अनुमान ?
दुनियाभर में सबसे पहले अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए चुनावी सर्वे कराए जाने की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। उस समय जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने इस विधा को अपनाया था, जिन्हें ओपिनियन पोल सर्वे का जनक माना जाता है।
हमारी हिन्दी के शिखर पुरुष का जाना
हिंदी का एक मौन साधक, महर्षि, मनीषी, जिसके आगे हर हिंदी प्रेमी नतमस्तक है, जिसके कर्म से हिन्दी भाषा समृद्ध बनी, ऐसे सजग हिन्दीचेता, महान् रचनाकार एवं समन्वयवादी-जुनूनी व्यक्तित्व श्री अरविन्दकुमार का गत सप्ताह मौन हो जाना, हिन्दी भाषा एवं सृजन-संसार की ए