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पर्यावरण की पर्याप्त रक्षा करके ही धरती पर मानव अस्तित्व को रख सकते है कायम
कोरोना से ठीक होने के बावजूद आम जनता की परेशानियां समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं और नए रूपों में आकर कोरोना सबको हैरान कर रहा है।
क्या स्वप्न सच के प्रतिबिम्ब होते हैं
स्वप्न का हमारे जीवन के साथ गहरा तादात्म्य है। स्वप्न क्यों आते हैं, उनका वास्तविक जीवन से क्या संबंध है, क्या स्वप्न सच के प्रतिबिम्ब होते हैं, क्या स्वप्न जीवन को प्रभावित करते हैं- ऐसे अनेक प्रश्न है जो बंद पलकों के पीछे की इस रोमांचक दुनिया से जुड़े ह
भारत-अमेरिका को मिलकर करना पड़ेगा चीन से चली महामारी का मुकाबला
भारत और अमेरिका विश्व के बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों देशों की आपसी साझेदारी वैश्विक मूल्यों पर आधारित है। पिछले कुछ वर्षों में भारत अमेरिकी संबंध ने एक नया आयाम प्राप्त किया है, चाहे वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग हो या वैश्विक एवं क्षेत्रीय रक्षा
जीवन का सौन्दर्य एवं शक्ति है परिवार
अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस हर साल 15 मई को मनाया जाता है। देश एवं दुनिया को परिवार के महत्व को बताने के लिए यह दिवस मनाया जाता हैं। प्राणी जगत एवं सामाजिक संगठन में परिवार सबसे छोटी इकाई है।
कोरोना से जंग: टीके पर एक राय तो बनाइए
एक भीड़-भाड़ वाले चिडिय़ाघर में एक मजबूत कद-काठी का इंसान शेरों को देखने की कोशिश में था। तभी एक अन्य शख्स की कोहनी उसे जा लगी, जो खुद शेरों को अच्छी तरह से देखना चाहता था।
पत्रकारिता शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए देश में बने मीडिया एजुकेशन काउंसिल
मीडिया के विद्यार्थी विदेशी पुस्तकों पर ज्यादा निर्भर हैं। लेकिन अगर हम देखें तो भारत और अमेरिका के मीडिया उद्योगों की संरचना और कामकाज के तरीके में बहुत अंतर है।
वैश्विक महामारी के दौर में राहतकारी ऑक्सीजन एक्सप्रेस की भूमिका में भारतीय रेल
आज अधिकांश कोरोना संक्रमितों के इलाज में मेडिकल आक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। कोरोना संक्रमण में सांस की नली से वायु फेफड़ों तक पहुंचती तो है, पर आगे प्राणवायु बन कर शरीर में संचारित नहीं हो पाती।
कोरोना और मनुष्य : एक वायरस के आगे घुटने टेक रही शक्तिशाली और आधुनिक सभ्यता
आज के हालात को देखकर लगता है कि न जाने ये समय इतना कठिन, इतना बेरहम और इतना निर्दयी क्यों हो गया है। हालांकि समय की इस क्रूरता के पीछे कभी न कभी, कहीं न कहीं रहा मानव ही है।
आपदा में मुनाफाखोरी ने बढ़ाई समस्या
आक्सीजन मनुष्य के लिए प्राणवायु है। वातावरण में मौजूद जिस आक्सीजन के जरिये हमारी सांसों की डोर चलती है, उसके लिए हमें न तो पैसे खर्च करने पड़ते हैं और न ही कतार लगानी पड़ती है।
कोरोना जैसी भयावह आपदा का सामना जीवनशैली में बदलाव से ही संभव
जीवनशैली जड़ नहीं होती। इस पर वैज्ञानिक शोध, संस्कृति व दर्शन के प्रभाव पड़ते रहते हैं। युद्ध और दीर्घकालिक सत्ता भी जीवनशैली पर प्रभाव डालते हैं। महामारियों के प्रभाव भी व्यापक होते हैं।