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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले के आरोपियों में शामिल 82 वर्षीय वरवरा राव को बुधवार को खराब स्वास्थ्य के आधार पर सशर्त जमानत दे दी। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ता राव के वकील आनंद ग्रोवर और राष्ट्रीय जांच एजेंसी का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल एस. वी. राजू की दलीलें सुनने के बाद जमानत की अर्जी मंजूर की।

पीठ ने बम्बई न्यायालय की ओर से तीन महीने की जमानत के आदेश को संशोधित करते हुए स्पष्ट किया कि जमानत की अनुमति सिर्फ चिकित्सा आधार पर दी जा रही है। यह आदेश अन्य आरोपियों या अपीलकर्ताओं के मामले में गुण-दोष के आधार पर प्रभावित नहीं करेगा।

शीर्ष अदालत ने राव पर शर्त लगाते हुए कहा कि वह जमानत का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग नहीं करेंगे। बिना अदालत की अनुमति के ग्रेटर मुंबई से बाहर कहीं नहीं जाएंगे या किसी गवाह से संपर्क करके जांच को को प्रभावित करेंगे।

जमानत पर बहस के दौरान वकील ग्रोवर ने पीठ को राव की गंभीर बीमारी से अवगत कराते हुए कहा था कि कैद की अवधि उनकी मौत की घंटी बजाएगी।
एनआईए का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल ने राव की जमानत का विरोध किया और कहा कि संगीन आरोपों के मद्देनजर उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा तेलुगु कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता राव को खराब स्वास्थ्य के आधार पर 13 अप्रैल को दी गई अंतरिम जमानत अवधि 19 जुलाई को अगली सुनवाई 10 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया था। इसे पहले भी जमानत की अवधि बढ़ाई गई थी।

न्यायमूर्ति ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 अगस्त को जमानत याचिका पर निर्णायक सुनवाई की जा सकती है और तब तक याचिकाकर्ता राव को उच्च न्यायालय से मिली स्वास्थ्य आधार पर जमानत जारी रहेगी।
राव की पहली अस्थायी 'चिकित्सा जमानत' 12 जुलाई को समाप्त होने वाली थी। इस वजह से उन्होंने (राव) शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।